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बैंक हड़ताल स्थगित: यूएफबीयू (UFBU) ने क्यों टाली 3 दिनों की राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल

आईबीए (IBA) के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद बैंक यूनियनों ने लिया राहत भरा फैसला; 5-डे बैंकिंग और पीएलआई (PLI) स्कीम समेत 4 प्रमुख मांगों पर बनी सहमति।

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भदैनी मिरर (बिजनेस डेस्क): देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के शीर्ष संगठन 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स' (UFBU) ने 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक प्रस्तावित अपनी तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल को फिलहाल स्थगित (Defer) कर दिया है।

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रविवार (27 सितंबर 2026) देर रात यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के बीच हुई एक मैराथन बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। दोनों पक्षों के बीच प्रमुख मुद्दों पर बनी आपसी सहमति के बाद यूएफबीयू ने सर्कुलर जारी कर हड़ताल स्थगित करने की आधिकारिक घोषणा की।

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क्यों बुलाई गई थी 3 दिनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल?

बैंक यूनियनों ने अपनी 4 मुख्य और लंबित मांगों को लेकर 28 से 30 सितंबर तक तीन दिनों का हड़ताल का आह्वान किया था:

  1. 5-डे बैंकिंग (Five-day Banking Week): लंबे समय से लंबित सप्ताह में केवल 5 दिन काम (सोमवार से शुक्रवार) की व्यवस्था को लागू करना।

  2. एकतरफा PLI योजना पर रोक: Performance Linked Incentive (PLI) योजना के एकतरफा कार्यान्वयन को फिलहाल टालना।

  3. द्विपक्षीय संशोधन: पीएलआई फ्रेमवर्क में बैंक प्रबंधन और यूनियनों के बीच आपसी सहमति से संशोधन करना।

  4. लंबित मुद्दों का निपटारा: पिछले वेतन समझौतों से जुड़े लंबे समय से अटके residual (अवशिष्ट) मुद्दों का त्वरित समाधान करना।

हड़ताल पूरी तरह रद्द (Cancel) क्यों नहीं की गई, केवल 'स्थगित' (Defer) क्यों हुई?

आईबीए (IBA) प्रबंधन के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद यूनियनों ने अपनी मांगों पर प्रगति देखी है। हालांकि, जब तक इन आश्वासनों और सहमतियों पर अंतिम लिखित आदेश या क्रियान्वयन (Implementation) नहीं हो जाता, तब तक बैंक यूनियनों ने रणनीति के तहत हड़ताल को 'स्थगित' रखा है। यदि आने वाले समय में प्रबंधन अपनी सहमतियों से पीछे हटता है, तो यूनियनें इस हड़ताल को पुनः शुरू कर सकती हैं।

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आम जनता और ग्राहकों को राहत

28 से 30 सितंबर के बीच हड़ताल स्थगित होने से सरकारी व निजी बैंकों का सामान्य कामकाज सुचारू रूप से चलता रहेगा। महीने के अंत में बैंकिंग सेवाएं बहाल रहने से आम जनता, व्यापारियों और कॉर्पोरेट जगत को पैसों के लेनदेन में बड़ी सहूलियत मिलेगी।