अमेज़न ने भारत समेत कई देशों में फिर की छंटनी! प्राइम डेज़ के बीच रिटेल डिवीजन से निकाले कर्मचारी
अमेज़न के 'प्राइम बिग डील डेज़' (Prime Big Deal Days) के दौरान रिटेल और स्टोर्स यूनिट में छंटनी; अमेरिका, ब्रिटेन और भारत के कर्मचारी प्रभावित, जेफ बेजोस बोले- 'महामारी में हुई थी ओवरहायरिंग'।
भदैनी मिरर बिजनेस डेस्क: दिग्गज टेक और ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न (Amazon) ने एक बार फिर से छंटनी की घोषणा की है। कंपनी ने मुख्य रूप से अपने 'स्टोर्स डिवीजन' (Stores Unit)—जो मुख्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को संभालता है—से कर्मचारियों की छंटनी की पुष्टि की है।

अमेज़न में यह छंटनी ऐसे समय में हुई है जब कंपनी का सबसे बड़ा शॉपिंग इवेंट 'प्राइम बिग डील डेज़' (Prime Big Deal Days) चल रहा है।
भारत, अमेरिका और ब्रिटेन के कर्मचारी प्रभावित
मामले से जुड़े सूत्रों और रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के अनुसार:
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कर्मचारियों का आंकड़ा: अमेज़न ने इस दौर में लगभग 1,000 से कम व्हाइट-कॉलर (कॉर्पोरेट) कर्मचारियों को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखाया है।
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प्रभावित क्षेत्र: अंदरूनी स्लैक (Slack) चैनलों पर कर्मचारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अमेरिका (US), ब्रिटेन (UK) और भारत (India) के कर्मचारी इस छंटनी से प्रभावित हुए हैं।
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विभाग: स्टोर्स यूनिट के तहत आने वाले कस्टमर सर्विस और सेलिंग पार्टनर सर्विसेज सहित अन्य विभागों से छंटनी की गई है।
अमेज़न का आधिकारिक बयान
कंपनी के प्रवक्ता ने ईमेल के जरिए जारी बयान में कहा, "हमने अपने स्टोर्स बिजनेस के कुछ हिस्सों में समायोजन (Adjustments) किया है। हमारा मानना है कि इस नए पुनर्गठन से हम अपनी प्राथमिकताओं को और बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम होंगे।"
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष और इस वर्ष की शुरुआत के दौरान अमेज़न द्वारा की गई 30,000 कर्मचारियों की बड़ी छंटनी के बाद छोटे-छोटे चरणों में नौकरी में कटौती का यह ताजा मामला है।
जेफ बेजोस ने बताई छंटनी की वजह: "कोविड काल में हुई थी ओवरहायरिंग"
अमेज़न के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष जेफ बेजोस (Jeff Bezos) ने एक इंटरव्यू के दौरान लगातार हो रही छंटनियों पर अपनी बात रखी।
बेजोस ने कहा:
"कोविड-19 महामारी के दौरान लोग घरों में बंद थे और लगातार ऑनलाइन ऑर्डर कर रहे थे। उस समय हमारे लिए वह एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण दौर था, जिसके कारण कंपनी में बड़े पैमाने पर ओवरहायरिंग (जरूरत से ज्यादा भर्तियां) हो गई थी। इसलिए अब व्यापारिक प्राथमिकताओं को देखते हुए यह कटौती आवश्यक हो गई थी।"
