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Siwan Blast News: बिहार के सीवान में तेज धमाकों से दहला अल्मापुर गांव; पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट से 7 लोगों की मौत

रिहायशी इलाके में अवैध तरीके से बनाए जा रहे थे पटाखे; धमाके से मकान की छत उड़ी, शरीर के टुकड़े दूर-दूर तक बिखरे

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क्राइम/नेशनल डेस्क (भदैनी मिरर): बिहार के सीवान जिले के बड़हरिया प्रखंड अंतर्गत जामो थाना क्षेत्र के अल्मापुर गांव में एक दर्दनाक हादसा हुआ है। दीपावली और छठ पर्व को लेकर रिहायशी इलाके में अवैध रूप से चलाए जा रहे पटाखा निर्माण के दौरान हुए भीषण विस्फोट में सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। धमाका इतना जबरदस्त था कि मकान की छत उड़ गई और मृतकों के शरीर के टुकड़े दूर-दूर तक बिखर गए। घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी और दहशत का माहौल है।

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दो घंटे तक रुक-रुककर होते रहे धमाके

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जिस घर में विस्फोट हुआ वहां अवैध रूप से बड़े पैमाने पर पटाखे बनाए जा रहे थे। त्योहारी सीजन को देखते हुए घर में भारी मात्रा में बारूद और विस्फोटक सामग्री डंप की गई थी।

अचानक हुए तेज धमाके की आवाज सुनकर जब ग्रामीण मौके की ओर दौड़े, तो वहां का भयावह मंजर देख उनके होश उड़ गए। मकान मलबे में तब्दील हो चुका था और चारों तरफ मांस के लोथड़े बिखरे पड़े थे। स्थिति तब और डरावनी हो गई जब विस्फोट के बाद मकान में भीषण आग लग गई और करीब दो घंटे तक रुक-रुककर छोटे-बड़े धमाके होते रहे, जिससे राहत एवं बचाव कार्य में भी भारी बाधा आई।

एक ही परिवार के पांच सदस्यों समेत 6 की हुई पहचान

विस्फोट इतना भयावह था कि शव पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे। लंबी मशक्कत और शवों के टुकड़ों को जोड़ने के बाद अब तक छह लोगों की पहचान हो चुकी है:

  • अमरुद्दीन (62 वर्ष)

  • अमरुद्दीन की पोतियां: मुस्कान (22 वर्ष), खुशबू (21 वर्ष) और इशरत (18 वर्ष)

  • पड़ोसी फिरोज का बेटा: अरशद (8 वर्ष)

  • स्थानीय मजदूर: राजकुमार सिंह उर्फ भोला सिंह

सातवें मृतक की पहचान अभी नहीं हो पाई है, जिसके लिए प्रशासन द्वारा डीएनए (DNA) जांच की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। हादसे में एक हंसता-खेलता परिवार पलभर में उजड़ गया।

10 साल पुराना कनेक्शन और प्रशासन पर उठे बड़े सवाल

इस खौफनाक हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 10 साल पहले भी इसी घर से एक ट्रक अवैध पटाखे बरामद किए गए थे।

लोगों का कहना है कि जब गांव के लोगों को इस अवैध गतिविधि की पूरी जानकारी थी, तो स्थानीय पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? रिहायशी इलाके के बीचों-बीच बिना किसी वैध अनुमति के भारी मात्रा में बारूद का भंडारण कैसे हो रहा था? यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो इस बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता था। फिलहाल, प्रशासनिक अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं और विस्फोट के असली कारणों व अवैध निर्माण के नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।