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पटना कोचिंग वॉर: प्रसिद्ध शिक्षक फैजल खान को कोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक बरकरार

'नो कोर्सिव एक्शन' का आदेश; विरोधी पक्ष ने लगाया जेल में हमले की साजिश का आरोप

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ब्यूरो: बिहार की राजधानी पटना के बहुचर्चित 'कोचिंग वॉर' मामले में प्रसिद्ध शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर को अदालत से बड़ी राहत मिली है। शनिवार को पटना सिविल कोर्ट में हुई एक अहम सुनवाई के दौरान, अदालत ने फैजल खान की अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करते हुए उनके अंतरिम संरक्षण (गिरफ्तारी से राहत) को अगली सुनवाई तक के लिए बढ़ा दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अगली तारीख तक फैजल खान की गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी।

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अदालत का आदेश— पुलिस न करे कोई 'कठोर कार्रवाई'

शनिवार को कोर्ट की कार्यवाही के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से मामले की अपडेटेड केस डायरी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई। केस डायरी का गहन अवलोकन करने के बाद अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने फिलहाल कोई भी अंतिम फैसला सुनाने के बजाय यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। इसके साथ ही अदालत ने फैजल खान और उनके पक्ष से जुड़े अन्य लोगों को 'नो कोर्सिव एक्शन' (No Coercive Action) का संरक्षण दिया है, जिसका मतलब है कि पुलिस इस दौरान उनके खिलाफ कोई भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं कर सकती।

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सुरक्षाकर्मियों की जमानत और विरोधी पक्ष के गंभीर आरोप

इस मामले में कानूनी मोड़ उस वक्त और दिलचस्प हो गया, जब फैजल खान के दोनों सुरक्षाकर्मियों की जमानत याचिका भी सुनवाई के लिए सामने आई। जहां एक तरफ खान सर को अंतरिम राहत मिल गई, वहीं दूसरी तरफ उनके अंगरक्षकों की जमानत को लेकर अदालत में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और कानूनी दांव-पेंच देखने को मिले।

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विरोधी पक्ष की दलीलें: विरोधी पक्ष के अधिवक्ता निरंजन कुमार ने फैजल खान की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने दावा किया कि इस पूरे विवाद और कथित साजिश का ताना-बाना 'खान ग्लोबल स्टडीज' के भीतर ही बुना गया था।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पीड़ित रौशन आनंद द्वारा कदमकुआं थाने में शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट को बताया कि पीड़ित रौशन आनंद पर जेल के भीतर भी हमले का प्रयास किया गया है और उनके भाई प्रिंस के साथ भी आपराधिक कृत्य हुआ है, जिसके चलते इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।

फिलहाल, अदालत के इस रुख के बाद खान सर के समर्थकों और शुभचिंतकों ने राहत की सांस ली है, लेकिन अब सबकी नजरें अगली सुनवाई और पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।