BIHAR: नौकरी के नाम पर छल! दुबई में बंधक बने पूर्णिया और किशनगंज के 7 युवक, पासपोर्ट जब्त
"न खाना मिल रहा है, न काम": वीडियो कॉल पर रोते हुए सुनाई आपबीती
भदैनी मिरर (Bhadaini Mirror) डेस्क: रोजगार की तलाश में विदेश गए बिहार के युवाओं के साथ एक बार फिर धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। पूर्णिया और किशनगंज जिले के रहने वाले 7 युवक दुबई में बंधक बन गए हैं। पीड़ित युवकों का आरोप है कि मोजा (Socks) बनाने वाली कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक एजेंट ने उनसे लाखों रुपये ठगे और फिर टूरिस्ट वीजा पर दुबई भेज दिया।


वहां पहुंचने पर नौकरी तो नहीं मिली, उल्टा कंपनी और एजेंट ने उनके पासपोर्ट भी जब्त कर लिए हैं। अब ये युवा बिना खाने-पीने के सड़कों पर दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।
1.5-1.5 लाख रुपये ऐंठे, टूरिस्ट वीजा पर भेजा दुबई
जानकारी के मुताबिक, पूर्णिया जिले के रौटा थाना क्षेत्र के तीन और किशनगंज के कोचाधामन के चार युवक गत 5 अगस्त को काम की तलाश में दुबई पहुंचे थे। पीड़ितों ने बताया कि नाहिद गनी नाम के एक एजेंट ने उन्हें मोजा फैक्ट्री में अच्छी नौकरी और सैलरी का लालच दिया था।

इस काम के बदले एजेंट ने प्रति युवक करीब 1.5 लाख रुपये वसूल किए थे। हालांकि, एजेंट ने उन्हें वर्क वीजा के बजाय 'टूरिस्ट वीजा' पर विदेश भेज दिया, जिसके बारे में युवकों को वहां पहुंचने के बाद पता चला।
"न खाना मिल रहा है, न काम": वीडियो कॉल पर रोते हुए सुनाई आपबीती
दुबई में फंसे युवाओं (जिनमें दिलफरोज आलम, नासिर आलम, रब्बान आदि शामिल हैं) का एक दर्दनाक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में युवक रो-रोकर हाथ जोड़ते हुए रिहाई की गुहार लगा रहे हैं।


पीड़ितों ने बताया कि:
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कंपनी प्रबंधन ने उनके पासपोर्ट छीन लिए हैं और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट भी की गई।
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घर से साथ लाए पैसे खत्म हो चुके हैं और अब उन्हें खाना तक नसीब नहीं हो रहा है।
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वे भीषण गर्मी में जमीन और सड़कों पर रात गुजारने को विवश हैं।
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धोखाधड़ी करने वाला एजेंट अब उन्हें उल्टे धमकियां दे रहा है।
पूर्व विधायक से लगाई मदद की गुहार, पुलिस प्रशासन से न्याय की उम्मीद
मुसीबत में फंसे इन युवाओं ने किशनगंज के कोचाधामन से पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद से वीडियो कॉल पर संपर्क कर अपनी आपबीती सुनाई और भारत सरकार से वतन वापसी कराने की गुहार लगाई। पूर्व विधायक ने वीडियो जारी कर आश्वस्त किया है कि वे विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं और युवाओं को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
