वाराणसी: धान की बुआई के बीच खाद संकट से फूटा किसानों का गुस्सा, सपा नेताओं ने सिगरा थाने पर दिया ज्ञापन
सहकारी समितियों पर लटके ताले, कालाबाजारी और तस्करी के खिलाफ भड़के किसान; सपा नेता हरीश मिश्रा के नेतृत्व में प्रदर्शन
वाराणसी। धान की बुआई के इस मुख्य सीजन में खाद की भारी किल्लत ने वाराणसी और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों की कमर तोड़ दी है। चोचचकपुर सहित पूरे कंदास क्षेत्र में डीएपी (DAP), यूरिया और पोटाश जैसी जरूरी खादों की भारी कमी के कारण अब किसानों का धैर्य जवाब दे गया है। इस गंभीर समस्या को लेकर नाराज किसानों, छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों और समाजवादी पार्टी के नेताओं का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा।
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खाद संकट के खिलाफ सपा नेता हरीश मिश्रा (बनारस वाले मिश्रा जी) के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और किसानों ने अनोखा प्रदर्शन किया। हाथ में फरसा लिए और बेहद सामान्य (दीनहीन) वेशभूषा में पहुंचे सपा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर को संबोधित एक ज्ञापन सिगरा थानाध्यक्ष शिवाकांत मिश्रा को सौंपा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने खाद की कथित कालाबाजारी और सीमा पार तस्करी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
सहकारी समितियों पर लटके ताले, बिचौलियों का बोलबाला
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया गया कि क्षेत्र की अधिकांश सरकारी और सहकारी समितियों पर ताले लटके हुए हैं। ऐसे समय में जब धान की रोपाई और बुआई के लिए किसानों को सबसे ज्यादा खाद की जरूरत है, सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। खाद न मिलने से बेबस किसान सुबह से शाम तक दर-दर भटकने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर, निजी दुकानदारों और बिचौलियों द्वारा खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर औने-पौने दामों (ऊंची कीमतों) पर खाद बेचे जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
अधिकारियों और दलालों के गठजोड़ का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समाजवादी पार्टी के नेता हरीश मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए सीधा आरोप लगाया कि इस संकट के पीछे खाद तस्करों, दलालों और विभागीय अधिकारियों का एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा है। उन्होंने कहा:
"आज हम सिगरा एसएचओ महोदय के पास किसानों की आवाज लेकर आए हैं। हमारे साथ किसान पुत्र संदीप यादव और अनिल यादव भी हैं। यह ज्ञापन सीधे तौर पर खाद के उन दलालों और तस्करों के खिलाफ है जो संकट के समय चांदी काट रहे हैं। सहकारी समितियों पर ताले हैं, जिससे धान की बुआई ठप होने की कगार पर है। भारत का अन्नदाता आज बेहद दयनीय और दीनहीन स्थिति में पहुंच गया है।"
प्रशासन के सामने रखी गई प्रमुख मांगें:
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बिचौलियों पर कार्रवाई: खाद की तस्करी और कालाबाजारी करने वाले बाहरी बिचौलियों के साथ-साथ विभागीय स्तर के भ्रष्ट अधिकारियों को भी चिह्नित कर तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
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15 दिन का अल्टीमेटम: वाराणसी क्षेत्र की सभी सहकारी समितियों पर अगले 15 दिनों के भीतर डीएपी, यूरिया और पोटाश की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
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पारदर्शी जांच: खाद वितरण व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि जरूरतमंद किसानों तक खाद सीधे पहुंच सके।
बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री अनिल यादव, पूर्व अध्यक्ष संदीप यादव सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। किसान नेताओं ने जिला प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर खाद की किल्लत दूर नहीं हुई और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक नहीं लगी, तो किसान वाराणसी में बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।