तमिलनाडु विधानसभा में हंगामा: CM विजय के बयानों पर बवाल, DMK विधायक सदन से बाहर निकाले गए
MISA और भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और DMK आमने-सामने; स्पीकर के आदेश के बाद विपक्षी विधायकों को सदन से बाहर किया गया।
तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के MISA (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) और पूर्व DMK सरकार से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों वाले बयानों को लेकर जमकर हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री के बयान को विधानसभा रिकॉर्ड से हटाने की मांग को लेकर मुख्य विपक्षी दल DMK के विधायकों ने सदन के अंदर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और बाद में स्पीकर के चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। स्थिति अनियंत्रित होते देख स्पीकर JCD प्रभाकर ने विधानसभा मार्शलों को DMK विधायकों को सदन से बाहर निकालने का निर्देश दिया।
MISA और सरकरिया आयोग के जिक्र पर विवाद
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही DMK के सचेतक ईवी वेलु ने मुख्यमंत्री विजय द्वारा सोमवार को दिए गए भाषण में MISA और सरकरिया आयोग के संदर्भों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री के भाषण के उन हिस्सों को विधानसभा के रिकॉर्ड से हटाया जाए।
मुख्यमंत्री विजय ने सोमवार को पूर्व DMK सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक दस्तावेज का हवाला दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ठेकेदारों से ठेकों की कुल रकम का 7.5 से 10 प्रतिशत तक 'पार्टी फंड' के रूप में मांगा जाता था, जिसे नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग के कामों से जोड़ा गया था। इसके साथ ही उन्होंने वीरानम जल योजना के संदर्भ में सरकरिया आयोग की रिपोर्ट का भी जिक्र किया था।
स्पीकर ने रिकॉर्ड से हटाने से किया इनकार
DMK की मांग को खारिज करते हुए स्पीकर JCD प्रभाकर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल ऐसी जानकारी का उल्लेख किया है, जो पहले से सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के भाषण में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे रिकॉर्ड से हटाया जाए। सरकार की ओर से कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने भी मुख्यमंत्री के बयानों का बचाव करते हुए कहा कि ये बातें आधिकारिक ED दस्तावेजों और सरकरिया आयोग की रिपोर्ट पर आधारित हैं।
मार्शलों द्वारा निष्कासन और सदन के बाहर धरना
स्पीकर के फैसले के बावजूद DMK विधायक नारेबाजी करते हुए पोडियम के सामने पहुंच गए और बिना अनुमति के पोस्टर लहराए। स्थिति को संभालते हुए स्पीकर ने विधायकों को अपनी सीटों पर लौटने के लिए एक मिनट का समय दिया, लेकिन विरोध थमता न देख उन्होंने मार्शलों और वॉच एंड वार्ड स्टाफ को प्रदर्शनकारी विधायकों को सदन से बाहर निकालने का आदेश दे दिया। इसके बाद DMK विधायकों ने स्पीकर के चैंबर के बाहर बैठकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।