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UP Politics News: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका! पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी पार्टी

रुहेलखंड के कद्दावर नेता और आंवला के दो बार के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का बीजेपी को 'टाटा-बाय बाय'; भितरघातियों को तरजीह देने से नाराज होकर दिया इस्तीफा।

 

भदैनी मिरर स्टेट डेस्क: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले रुहेलखंड क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे कद्दावर नेता धर्मेंद्र कश्यप ने बुधवार को औपचारिक रूप से भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया।

उनके इस फैसले से उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि धर्मेंद्र कश्यप जल्द ही समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम सकते हैं। सपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने इनकार न करते हुए कहा कि वे जल्द ही समर्थकों के साथ बैठक कर अगला फैसला लेंगे।

फेसबुक पर 'टाटा-बाय बाय' लिखकर पैदा किया था रहस्य

धर्मेंद्र कश्यप के इस्तीफे की पटकथा मंगलवार शाम ही लिखी जाने लगी थी, जब उन्होंने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर रहस्यमयी अंदाज में 'टाटा-बाय बाय' लिखा था। इसके बाद बुधवार सुबह उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आधिकारिक रूप से भाजपा से अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया।

भितरघातियों को तवज्जो मिलने से गहरी नाराजगी

पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद ने भाजपा संगठन और स्थानीय नेताओं की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला।

  • नाराजगी की मुख्य वजह: उन्होंने कहा, "2024 के लोकसभा चुनाव में जिन लोगों ने मेरे खिलाफ खुलकर काम किया और मुझे हराने के लिए भितरघात किया, पार्टी ने उन्हीं अनुशासनहीन लोगों को दंडित करने के बजाय आगे बैठाने और बड़े पद देने का काम किया है।"

  • अनुशासन पर सवाल: उन्होंने कहा कि जब निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर भितरघातियों को शह दी जाएगी, तो पार्टी को 'टाटा-बाय बाय' कहना स्वाभाविक ही है।

बेटी की राजनीति और सपा से नजदीकियों के संकेत

धर्मेंद्र कश्यप 2014 और 2019 में लगातार दो बार भाजपा के टिकट पर आंवला से सांसद चुने गए थे। 2024 के चुनाव में वे सपा के नीरज मौर्य से मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे।

चर्चा है कि उनकी बेटी कीर्ति कश्यप भी आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। यदि धर्मेंद्र कश्यप समाजवादी पार्टी में शामिल होते हैं, तो कीर्ति कश्यप को सपा से उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

रुहेलखंड की राजनीति में कश्यप समीकरण

रुहेलखंड और कश्यप-निषाद बहुल इलाकों में धर्मेंद्र कश्यप की मजबूत पकड़ मानी जाती है। भाजपा लगातार तीन लोकसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) से उन्हें अपना उम्मीदवार बनाती आ रही थी। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उनका भाजपा छोड़ना क्षेत्र में पार्टी के कश्यप-पिछड़ा वोट बैंक समीकरण के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।