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TN Medical Seats Controversy: उदयनिधि स्टालिन की सीएम जोसेफ विजय से अपील- 'नेशनल कोटे में न जाने दें 152 सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटें'

विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र; टीवीके (TVK) सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में ढीली पैरवी करने का लगाया आरोप, कहा- स्थानीय डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवाओं को होगा बड़ा नुकसान।

 

चेन्नई डेस्क (भदैनी मिरर):

तमिलनाडु में सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष (Leader of the Opposition) उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) को एक आधिकारिक पत्र लिखकर बेहद गंभीर मुद्दा उठाया है। स्टालिन ने मुख्यमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि राज्य की 152 खाली पड़ी सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को ऑल-इंडिया कोटा (AIQ) यानी राष्ट्रीय कोटे में सरेंडर होने से रोका जा सके।

'टीवीके सरकार की कमजोर पैरवी के कारण पैदा हुई स्थिति'

उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु की वर्तमान टीवीके (TVK) नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील सही और पुख्ता तर्क पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे। इसी ढीली पैरवी का नतीजा है कि सर्वोच्च अदालत ने 29 मई को अपने आदेश में तमिलनाडु की इन 152 सीटों को ऑल इंडिया कोटे में ट्रांसफर करने का निर्देश दे दिया।

क्या है पूरा मामला? ( सीटों का गणित )

मामले की पृष्ठभूमि को समझाते हुए विपक्ष के नेता ने बताया:

  • वर्ष 2025 की नीट (NEET) परीक्षा के आधार पर तमिलनाडु में सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल की कुल 430 सीटें उपलब्ध थीं।

  • राज्य की नीति के तहत इनमें से 50 फीसदी यानी 215 सीटें सरकारी अस्पतालों में कार्यरत (In-Service) डॉक्टरों के लिए आरक्षित थीं।

  • नियमित काउंसलिंग के दौरान इन आरक्षित सीटों में से केवल 63 सीटें ही भरी जा सकीं, जिसके बाद दूसरे दौर की काउंसलिंग समाप्त होने पर 152 सीटें खाली रह गईं।

इसके बाद, तमिलवानी नामक एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर इन खाली सीटों को नेशनल पूल (AIQ) में स्थानांतरित करने की मांग की थी। उदयनिधि ने दावा किया कि जब अप्रैल महीने (8, 10 और 16 अप्रैल) में सुनवाई हुई थी, तब तत्कालीन द्रमुक (DMK) सरकार ने प्रभावी ढंग से तर्क पेश कर इन सीटों के ट्रांसफर पर रोक लगवा दी थी। लेकिन नई सरकार के आते ही मई की सुनवाइयों (25 और 29 मई) में कानूनी रणनीति लड़खड़ा गई।

'सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा बुरा असर'

इस फैसले के दूरगामी और गंभीर परिणामों की चेतावनी देते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि इन सीटों को सरेंडर करने से तमिलनाडु के इन-सर्विस डॉक्टरों के करियर प्रोग्रेस को बड़ा झटका लगेगा।

उदयनिधि स्टालिन का बयान:

"यदि ये सीटें राष्ट्रीय कोटे में चली गईं, तो राज्य के सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होगी। विशेष रूप से कार्डियोलॉजी (हृदय रोग), ऑन्कोलॉजी (कैंसर), और न्यूरोलॉजी (मस्तिष्क रोग) जैसे महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञों की भारी कमी हो जाएगी, जिसका सीधा खामियाजा गरीब जनता को भुगतना पड़ेगा।"

उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से अपील की है कि वे तुरंत इस मामले में कानूनी कदम उठाएं, सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य का पक्ष मजबूती से दोबारा रखें और स्थानीय सरकारी डॉक्टरों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करें।