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फलता सीट से TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने वापस लिया नामांकन, CM शुभेंदु अधिकारी का तंज- 'डरकर भाग गए पुष्पा'

नाम वापसी को टीएमसी ने बताया कैंडिडेट का 'निजी फैसला'

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने और सूबे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद भी वहां का सियासी पारा थमता नजर नहीं आ रहा है। राज्य की फलता विधानसभा सीट पर होने वाले पुनर्मतदान (Re-polling) से ठीक दो दिन पहले मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक अपना नामांकन वापस लेकर सबको चौंका दिया है।

जहांगीर खान के इस फैसले के बाद राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन पर तीखा हमला बोला है, जबकि टीएमसी ने इसे पार्टी का नहीं बल्कि उम्मीदवार का व्यक्तिगत फैसला करार दिया है।

जहांगीर खान ने दी यह दलील, शुभेंदु बोले- 'पोलिंग एजेंट तक नहीं मिला'

अपना नामांकन वापस लेने के बाद टीएमसी नेता जहांगीर खान ने दावा किया कि उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फलता क्षेत्र के विकास के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज देने का वादा किया है।

हालांकि, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जहांगीर के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए डायमंड हार्बर की एक रैली में तंज कसा। उन्होंने कहा:

"वह (जहांगीर खान) विकास के लिए नहीं, बल्कि हार के डर से भाग गए हैं क्योंकि उन्हें अपनी ही सीट पर एक पोलिंग एजेंट तक नसीब नहीं हो रहा था। चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खुद को फिल्म का किरदार 'पुष्पा' बताते हुए कहते थे कि 'झुकेगा नहीं'... अब वही पुष्पा कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।"

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 2021 की चुनावी हिंसा के बाद जिन 19 कुख्यात अपराधियों की सूची जारी की थी, उनमें जहांगीर का नाम भी शामिल था।

बीजेपी कार्यकर्ताओं को अलर्ट रहने की सलाह: "यह टीएमसी का 'माइंड गेम' हो सकता है"

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फलता के बीजेपी कार्यकर्ताओं और आम जनता को आगाह करते हुए कहा कि हमें इस नाम वापसी के बाद भी ढीला नहीं पड़ना है। उन्होंने कहा:

"यह टीएमसी की एक सोची-समझी रणनीति (माइलाज गेम) भी हो सकती है। वे चाहते हैं कि फलता के लोग यह मान लें कि बीजेपी तो बिना लड़े ही जीत गई और वे 21 मई को वोट डालने ही न जाएं। फलता की जनता को याद रखना चाहिए कि उन्हें पूरे 10 साल बाद बिना किसी डर के खुलकर मतदान करने का अधिकार मिला है, इसलिए यहां 100 फीसदी वोटिंग होनी चाहिए।"

TMC का पलटवार: 'भारी दबाव में पीछे हटे जहांगीर, आयोग मूकदर्शक'

इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर कहा कि जहांगीर खान का चुनाव से पीछे हटना उनका निजी फैसला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद से फलता में टीएमसी के 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को फर्जी तरीके से गिरफ्तार किया गया है। कई पार्टी दफ्तरों में तोड़फोड़ कर उन पर जबरन कब्जा कर लिया गया है। टीएमसी का कहना है कि भारी दबाव और डराने-धमकाने के कारण कुछ लोग (जहांगीर) पीछे हट गए, लेकिन जमीनी कार्यकर्ता अब भी डटे हुए हैं।

क्यों हो रहा है फलता सीट पर दोबारा मतदान?

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर ममता बनर्जी के 15 साल पुराने शासन को उखाड़ फेंका है, जबकि टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई है।

लेकिन फलता सीट के सभी 285 पोलिंग बूथों पर 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। चुनाव पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट में ईवीएम से छेड़छाड़, बैलेट यूनिट के बटनों पर काली टेप चिपकाने और वोटर्स को डराने की पुष्टि हुई थी। इसी वजह से चुनाव आयोग ने वहां का मतदान रद्द कर दिया था। अब फलता सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होगा और इसके नतीजे 24 मई को घोषित किए जाएंगे।