'AAP' का अंत करीब? प्रशांत भूषण का केजरीवाल पर बड़ा हमला, राघव चड्ढा की बगावत को बताया 'टिकट बिक्री' का नतीजा
"पैसे लेकर राज्यसभा टिकट बाँटने का यही अंजाम होना था"; संस्थापक सदस्य प्रशांत भूषण ने आम आदमी पार्टी के भविष्य पर की भविष्यवाणी
नई दिल्ली (भदैनी मिरर): आम आदमी पार्टी (AAP) के संस्थापक सदस्यों में शुमार रहे और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के भविष्य को लेकर एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है। एक हालिया इंटरव्यू में भूषण ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी का राजनीतिक भविष्य अंधकार में है और यह दल धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
राघव चड्ढा की बगावत और 'कमजोर नब्ज' का खेल
राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों द्वारा की गई बगावत पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत भूषण ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "जब आप पैसे लेकर राज्यसभा के टिकट बेचेंगे और ऐसे लोगों को संसद भेजेंगे जिनकी कोई 'कमजोर नब्ज' (Weak Spot) हो, तो यही अंजाम होगा।" भूषण के मुताबिक, भाजपा ने इन्हीं कमजोरियों को पकड़ा और सांसदों को 'ब्लैकमेल' के आधार पर अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने आशंका जताई कि पार्टी अब जल्द ही 'वाइंड-अप' (बोरिया-बिस्तर बंधना) की स्थिति में पहुंच जाएगी।
केजरीवाल पर लगाया 'साजिश' का आरोप
पुराने दिनों को याद करते हुए प्रशांत भूषण ने बताया कि कैसे पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र को खत्म किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने अपने ही साथियों को दरकिनार करने के लिए झूठी साजिशें रचीं।
भूषण का बड़ा खुलासा: "एक बार अरविंद ने अपने ही नेता को बदनाम करने के लिए उनके नाम से फर्जी मैसेज चलवा दिया कि हमें भाजपा जॉइन कर लेनी चाहिए। जब मैंने इसकी जांच की मांग की, तो पता चला कि वह मैसेज खुद केजरीवाल के ही आदमी ने भेजा था।"
आदर्शों की बलि और 'B' क्लास पार्टी
प्रशांत भूषण ने कहा कि 'आप' को आम वॉलंटियर्स का मंच बनाने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन केजरीवाल ने पारदर्शिता और आंतरिक लोकपाल जैसी नीतियों को खत्म कर इसे 'बी-क्लास' पॉलिटिकल पार्टी बना दिया। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य झगड़ा उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया और कैंडिडेट लिस्ट में धांधली को लेकर हुआ था, जिसके बाद उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली।
भविष्य पर सवालिया निशान
प्रशांत भूषण का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आम आदमी पार्टी अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। संस्थापक सदस्य के ये आरोप न केवल केजरीवाल की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं, बल्कि पार्टी के भीतर मचे घमासान और राज्यसभा सांसदों के भाजपा के प्रति झुकाव को एक नया आयाम देते हैं।