पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से सांसद राघव चड्ढा का नाम गायब
वोटर लिस्ट में 'पर्मानेंटली शिफ्टेड' दर्ज होने पर सियासत गर्म, चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी का करारा पलटवार
नई दिल्ली/चंडीगढ़/वाराणसी (भदैनी मिरर न्यूज़): पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम गायब होने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में चड्ढा की एंट्री के आगे 'पर्मानेंटली शिफ्टेड' (Permanently Shifted) दर्ज किया गया है। इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राघव चड्ढा ने इसे प्रशासनिक या क्लेरिकल गलती मानने से इनकार कर दिया और पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई का सीधा आरोप लगाया है।
मोहाली में रजिस्टर्ड है वोटर आईडी: राघव चड्ढा
बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में पंजीकृत है। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने मोहाली में ही वोट डाला था, इसके बावजूद स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में उन्हें 'शिफ्टेड' के तौर पर क्लासिफाई कर दिया गया।
चड्ढा ने स्पष्ट किया कि यह अभी सिर्फ ड्राफ्ट वोटर लिस्ट है, अंतिम सूची नहीं। वह चुनाव आयोग की दावे और आपत्तियों (Claims and Objections) की कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए कदम उठा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में इस गड़बड़ी को ठीक कर लिया जाएगा।
"अधिकारियों पर बनाया जा रहा दबाव"
पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए चड्ढा ने सवाल उठाया कि ज़मीनी स्तर पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) तक, पूरी प्रक्रिया में राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी ड्यूटी खत्म होने के बाद इन अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर पर राज्य सरकार का ही नियंत्रण रहता है, जिससे उन पर राजनीतिक दबाव बनाकर इस तरह की कार्रवाई कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि आप (AAP) भले ही पंजाब में सरकार चला रही हो, लेकिन वोटर लिस्ट उसकी निजी जायदाद नहीं है।
'प्रोटेक्टेड लिस्ट' के नियम का उल्लंघन
सांसद ने चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के पैराग्राफ 4(d) का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रावधान के तहत सांसदों, विधायकों, न्यायाधीशों और अन्य जनप्रतिनिधियों को 'प्रोटेक्टेड लिस्ट' (Protected List) के तहत ड्राफ्ट सूची में बनाए रखने का नियम है, ताकि आपत्तियों की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सकें। चड्ढा का दावा है कि उनके मामले में इस नियम का जानबूझकर उल्लंघन किया गया है।
आम आदमी पार्टी का पलटवार
राघव चड्ढा के इन आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने भी तीखा हमला बोला है। AAP ने कहा कि एक राष्ट्रीय अंग्रेजी समाचार पत्र ने राघव चड्ढा को दिल्ली में बैकडेटेड प्रक्रिया के जरिए अपना वोटर रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश करते हुए पकड़ा है और अब वह अपनी विफलता का ठीकरा पंजाब सरकार पर फोड़ रहे हैं।
AAP ने स्पष्ट किया कि SIR अभियान का संचालन चुनाव आयोग (EC) करता है, न कि राज्य सरकार। इसलिए सूची में किसका नाम जोड़ना है या हटाना है, इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है। पार्टी ने आगे कहा कि यह जगजाहिर है कि राघव चड्ढा अब पंजाब में नहीं बल्कि दिल्ली में रह रहे हैं। अगर वह पंजाब में नहीं रहते हैं, तो अपना वोटर रजिस्ट्रेशन समय पर शिफ्ट या मेंटेन करना उनकी खुद की जिम्मेदारी थी।