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राष्ट्रपति चुनाव 2027: बंगाल और महाराष्ट्र की जीत ने पलटा पासा, क्या लोकसभा की 'कमी' विधायक करेंगे पूरी?

शीर्षक: बड़े राज्यों में NDA के बढ़ते कदम ने मजबूत किया बीजेपी का पलड़ा, जानें राष्ट्रपति चुनाव के वोट वैल्यू का पूरा गणित।

 

नई दिल्ली (भदैनी मिरर डेस्क):

भारतीय राजनीति के गलियारों में इस समय 2027 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भले ही बीजेपी अपने दम पर बहुमत के जादुई आंकड़े (272) तक नहीं पहुंच पाई थी, लेकिन हालिया विधानसभा चुनावों और राज्यों में बदलती सियासी समीकरणों ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को एक नई ताकत दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार जैसे बड़े राज्यों में बीजेपी और उसके सहयोगियों के शानदार प्रदर्शन ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव का पूरा गणित ही बदल दिया है।

बड़े राज्यों का 'वोट वैल्यू' खेल

राष्ट्रपति का चुनाव एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य हिस्सा लेते हैं। यहाँ जीत का फैसला केवल संख्या से नहीं, बल्कि 'वोट वैल्यू' से होता है।

  • सांसदों की वैल्यू: प्रत्येक सांसद के वोट की वैल्यू समान होती है।

  • विधायकों की वैल्यू: विधायक के वोट की वैल्यू राज्य की जनसंख्या (1971 की जनगणना) पर आधारित होती है।

यही कारण है कि सिक्किम (वैल्यू-7) के मुकाबले उत्तर प्रदेश (वैल्यू-208) जैसे राज्य निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

बंगाल और महाराष्ट्र ने दिया बीजेपी को बूस्ट

लोकसभा चुनाव के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी का वर्चस्व कम हो सकता है, लेकिन राज्यों के परिणामों ने विपक्ष के दावों को पीछे छोड़ दिया है।

  1. पश्चिम बंगाल: यहाँ बीजेपी ने अपनी ताकत को कई गुना बढ़ाया है। पिछले चुनाव में जहाँ पार्टी के पास 77 विधायक थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 207 तक पहुँच गई है।

  2. महाराष्ट्र: 288 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए का कुनबा 150 से बढ़कर 237 विधायकों तक पहुँच गया है।

  3. बिहार: यहाँ भी एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है और संख्या 202 के पार चली गई है।

लोकसभा के नुकसान की भरपाई

2024 में बीजेपी की सीटें 303 से घटकर 240 रह गई थीं, जिससे राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल (Electoral College) में पार्टी को करीब 44,100 वोटों का नुकसान हुआ था। उस वक्त ऐसा लगा था कि बीजेपी को राष्ट्रपति चुनने के लिए टीडीपी और जेडीयू जैसी पार्टियों की शर्तों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

लेकिन, अब हरियाणा की जीत और बड़े राज्यों में विधायकों की संख्या बढ़ने से बीजेपी की 'सौदेबाजी' की शक्ति बढ़ गई है। अब पार्टी अपने दम पर अपनी पसंद का राष्ट्रपति चुनने के बेहद करीब खड़ी है।

यूपी रहेगा 'पावर सेंटर'

राष्ट्रपति चुनाव 2027 के लिए अभी भी सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश है। निर्वाचक मंडल में यूपी के पास 83,800 से अधिक वोट हैं। यदि बीजेपी यहाँ अपनी पकड़ बनाए रखती है, तो अगले साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए को चुनौती देना विपक्ष के लिए लगभग नामुमकिन होगा।