भवानीपुर में हार मानने को तैयार नहीं ममता बनर्जी, चुनावी नतीजों को कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती; दोबारा गिनती की मांग
गढ़ ढहने के बाद ममता का बड़ा कदम, शुभेंदु अधिकारी की जीत को रद्द करने की याचिका; संकट में घिरी TMC
कोलकाता (भदैनी मिरर): पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में लगे करारी शिकस्त के झटकों के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कानूनी लड़ाई का रास्ता अख्तियार कर लिया है। भवानीपुर विधानसभा सीट पर मिली बड़ी हार को स्वीकार न करते हुए ममता बनर्जी ने मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) का रुख किया। उन्होंने भवानीपुर के चुनावी नतीजों को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है, जिसमें वर्तमान परिणाम को रद्द करने और वोटों की दोबारा गिनती (Re-counting) कराने की मांग की गई है।
अभेद्य किला ढहने से लगा है बड़ा झटका
भवानीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी और टीएमसी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था। यहाँ के आधिकारिक चुनावी नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,015 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी। इस गढ़ के ढहने को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जिसकी भरपाई के लिए अब कानूनी दांवपेच आजमाया जा रहा है।
शुभेंदु अधिकारी बने 'जायंट किलर'
हालिया विधानसभा चुनावों में शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के लिए सबसे बड़े 'जायंट किलर' बनकर उभरे हैं। उन्होंने न केवल ममता बनर्जी को उनके सबसे सुरक्षित गढ़ भवानीपुर में मात दी, बल्कि नंदीग्राम सीट पर भी शानदार जीत दर्ज की। वर्तमान में शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाल रहे हैं।
पुरानी और नई याचिकाओं पर टिकी नजरें
दिलचस्प बात यह है कि यह नया कानूनी कदम ममता बनर्जी की उस पुरानी याचिका के निपटारे से ठीक पहले आया है, जिसमें उन्होंने 2021 के नंदीग्राम चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी। साल 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को महज 1,956 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराया था, जिसके खिलाफ ममता ने रिटर्निंग अधिकारी को धमकी मिलने के आरोप लगाते हुए कोर्ट में केस किया था। अब इन दोनों ही याचिकाओं पर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई होने वाली है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
भीषण संगठनात्मक और राजनीतिक संकट में फंसी TMC
भवानीपुर कोर्ट केस के बीच तृणमूल कांग्रेस इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर और आंतरिक बगावत से गुजर रही है। पार्टी के भीतर मचे घमासान का आलम यह है कि टीएमसी के 20 बागी सांसदों का एक बड़ा गुट, जिसमें ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली सायनी घोष भी शामिल हैं, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) की सहयोगी पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय कर चुका है। वहीं दूसरी तरफ, पार्टी के बागी विधायक ऋतब्रता बनर्जी पहले ही 58 विधायकों के साथ ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। ऐसे में इस कानूनी लड़ाई को पार्टी के बिखरते वजूद को थामने की एक कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।