Maharashtra Politics: 'मेरी सलाह मानते तो आज PM होते शरद पवार', केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दिया NDA में आने का न्योता
केंद्रीय मंत्री आठवले का बड़ा बयान—शरद पवार के अनुभव से देश और महाराष्ट्र को मिलेगा फायदा, पुराने दिनों को याद कर कही ये बड़ी बात।
राजनीतिक डेस्क (भदैनी मिरर): महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI-A) के प्रमुख रामदास आठवले ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने का खुला आमंत्रण दिया है। आठवले ने दावा किया है कि शरद पवार के लंबे और समृद्ध राजनीतिक अनुभव का लाभ न केवल महाराष्ट्र को बल्कि पूरे देश की राजनीति को मिल सकता है।
मुंबई में मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शरद पवार की तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने कहा कि शरद पवार देश के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी राजनेताओं में से एक हैं। उन्होंने कई दशकों तक महाराष्ट्र के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आठवले के मुताबिक, अगर शरद पवार इस समय एनडीए के साथ आते हैं, तो केंद्र सरकार और देश के विकास कार्यों को एक नई गति मिलेगी।
पुरानी सलाह मान लेते, तो बन जाते PM: आठवले
इस दौरान रामदास आठवले ने अपने और शरद पवार के पुराने राजनीतिक संबंधों का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने एक दिलचस्प वाकया साझा करते हुए कहा:
"जब हम पवार साहब के साथ काम कर रहे थे, तब मैंने उन्हें अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की सलाह दी थी। अगर उन्होंने उस समय मेरी वह सलाह मान ली होती, तो इतिहास कुछ और होता और शायद वह आज देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन होते।"
महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हलचल तेज
रामदास आठवले का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरदचंद्र पवार) इस समय विपक्ष की राजनीति में बेहद आक्रामक है। वे महाराष्ट्र में 'महाविकास आघाड़ी' (MVA) के मजबूत स्तंभ के रूप में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और 'महायुति' गठबंधन के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। विपक्षी खेमे के सबसे बड़े रणनीतिकार को एनडीए की तरफ से मिले इस खुले ऑफर के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है।
हालांकि, रामदास आठवले के इस आमंत्रण और दावे पर शरद पवार या उनकी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पलटवार सामने नहीं आया है। लेकिन सूबे के बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस बयान ने चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म कर दिया है।