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पूर्व IAS दिव्या मित्तल का बड़ा ऐलान: राजनीति में करेंगी एंट्री, बिना किसी पार्टी में शामिल हुए लड़ेंगी जनता की लड़ाई

मिर्जापुर और देवरिया की पूर्व डीएम दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सेवा से इस्तीफे के बाद फैसला; उत्तर प्रदेश को बताया कर्मभूमि, जवाबदेही की राजनीति का दिया नारा।

 

उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के कुछ ही दिनों बाद राजनीति में आने का बड़ा ऐलान कर दिया है। मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी स्थापित राजनीतिक दल (पार्टी) में शामिल नहीं होंगी, बल्कि जनता के साथ मिलकर एक नई राजनीतिक व्यवस्था और जवाबदेही की लड़ाई लड़ेंगी।

आईएएस पद से इस्तीफा स्वीकार होने के बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब विराम लग गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उनका यह कदम राज्य की सियासत में काफी अहम माना जा रहा है। दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी 'कर्मभूमि' बताते हुए यहीं से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही है।

"मैं उन लोगों की आवाज बनना चाहती हूं जिनकी सुनवाई नहीं होती"

वीडियो संदेश में अपने इस्तीफे के बाद उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए दिव्या मित्तल ने कहा, "कुछ दिनों पहले मैंने आईएएस से इस्तीफा दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। आज मैं उन सवालों के जवाब देने आई हूं। पहला सवाल कि आगे क्या? जवाब है— राजनीति।"

उन्होंने आगे कहा, "लोगों ने मुझसे कहा कि आपने सब कुछ हासिल कर लिया है, अब आप क्या बनना चाहती हैं? मैं उन लोगों की आवाज बनना चाहती हूं जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंचती और अगर पहुंचती भी है, तो सुनी नहीं जाती। मैं अपने देश की 80 साल की आजादी का हिसाब चाहती हूं।"

लहुरिया दह की घटना का किया जिक्र, नौकरशाही की नीयत पर उठाए सवाल

मिर्जापुर की डीएम रहने के दौरान लहुरिया दह गांव में दूरदराज तक नल से पानी पहुंचाने के लिए सराही गईं दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मिर्जापुर की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक महिला उनके पास पेंशन या मकान मांगने नहीं, बल्कि गांव में कक्षा 5 से आगे के स्कूल की मांग लेकर आई थी।

दिव्या मित्तल ने कहा, "मैंने नियमों की जांच कर स्कूल की मंजूरी दे दी, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका। यह सिर्फ इच्छाशक्ति (Willpower) की कमी थी। अगर नीयत होती तो पहाड़ भी रास्ता दे देता, लेकिन नीयत नहीं थी तो एक छोटी सी फाइल पहाड़ बन गई। मैं ऐसी ही देरी और लापरवाही की जवाबदेही तय करना चाहती हूं।"

पेपर लीक, बेरोजगारी और सड़कों की बदहाली पर उठाए मुद्दे

दिव्या मित्तल ने ग्रामीण इलाकों में सड़कों व पुलों के अभाव, बारिश में बच्चों और परिवारों को होने वाली समस्याओं पर चिंता जताई। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं के भविष्य, परीक्षा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में सालों की देरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण रोजगार पर मंडराते खतरे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। दो बेटियों की मां होने के नाते उन्होंने कहा कि वे आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

उन्होंने कहा, "आज हमारी राजनीति में सब कुछ है— सत्ता है, शोर है, लेकिन सोच नहीं है। मुझे उस सोच की कमी का हिसाब चाहिए।"

"बदलाव की राजनीति: किसी पार्टी के साथ नहीं, आपके साथ करूंगी काम"

दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया, "हमें राजनीति बदलनी होगी। मैं राजनीति करूंगी, लेकिन किसी के साथ या किसी पार्टी के साथ नहीं, बल्कि आप सभी (जनता) के साथ। मेरी लड़ाई उत्तर प्रदेश से होगी।"

उन्होंने समाज के हर वर्ग— शिक्षकों, किसानों, छात्रों, डॉक्टरों, मजदूरों और वकीलों से अपील की कि वे इस परिवर्तन की यात्रा में उनका साथ दें। उन्होंने कहा कि कोई भी सार्थक राजनीतिक बदलाव केवल सामूहिक जनभागीदारी के जरिए ही संभव है।