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सीएम बनते ही डीके शिवकुमार को तगड़ा झटका, कैबिनेट विस्तार के दो दिन भीतर ही वरिष्ठ मंत्री का इस्तीफा

बेंगलुरु विकास मंत्रालय की जिद पर अड़े थे 8 बार के विधायक रेड्डी, डीके शिवकुमार कैबिनेट में विभागों के बंटवारे के बाद बढ़ा विवाद

 

बेंगलुरु: कर्नाटक में सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद 3 जून 2026 को डीके शिवकुमार ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। लेकिन सरकार गठन के महज दो दिन के भीतर ही कांग्रेस सरकार को बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। मंत्रिमंडल में मनमाफिक विभाग (पोर्टफोलियो) न मिलने से नाराज वरिष्ठ कांग्रेस नेता और आठ बार के विधायक रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।

गुरुवार रात को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने 13 मंत्रियों को विभागों का बंटवारा किया था, जिसके बाद से ही असंतोष की चिंगारी भड़क उठी। आज यानी शुक्रवार सुबह रामलिंगा रेड्डी ने एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और मंत्री पद छोड़ने का औपचारिक ऐलान कर दिया। इस इस्तीफे के बाद कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस आलाकमान के बीच हलचल तेज हो गई है।

क्या है रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी की असली वजह?

रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी की मुख्य वजह 'बेंगलुरु विकास मंत्रालय' (Bengaluru Development Ministry) न मिलना है। सूत्रों के मुताबिक, रेड्डी ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे बेंगलुरु विकास मंत्रालय के अलावा कोई और विभाग स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन सरकार ने उनकी मांग को दरकिनार करते हुए उन्हें 'वृहद और मध्यम सिंचाई' विभाग सौंप दिया।

इस्तीफे के बाद रामलिंगा रेड्डी ने मीडिया से कहा:

"मैं पिछले 53 सालों से कांग्रेस पार्टी में हूं और अभी भी पार्टी में ही रहूंगा। मैंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है, सिर्फ मंत्री पद छोड़ा है। मैंने एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा समेत कई मुख्यमंत्रियों की कैबिनेट में काम किया है। मैंने कभी किसी से पद नहीं मांगा, लेकिन आत्मसम्मान और किए गए वादे की अनदेखी के चलते मुझे यह कदम उठाना पड़ा।"

बताया जा रहा है कि गुरुवार को विभागों के बंटवारे के लिए हुई उच्च स्तरीय बैठक में रेड्डी ने मुख्यमंत्री को साल 2023 में किया गया वो वादा याद दिलाया था, जिसमें कैबिनेट फेरबदल के दौरान उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने की बात कही गई थी। बात न बनने पर वे बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए थे।

सीएम डीके शिवकुमार ने अपने पास रखे भारी-भरकम विभाग

राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सबसे महत्वपूर्ण वित्त और कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग अपने पास ही रखे हैं।

अन्य मंत्रियों को मिले प्रमुख विभाग:

  • कृष्णा बायरे गौड़ा: इन्हें वृहत बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) के तहत 'बेंगलुरु शहरी विकास विभाग' सौंपा गया है (इसी विभाग की मांग रामलिंगा रेड्डी कर रहे थे)।

  • जी परमेश्वर (उपमुख्यमंत्री): राजस्व विभाग के साथ-साथ युवा सशक्तीकरण और खेल विभाग।

  • प्रियंक खरगे: गृह विभाग के साथ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग।

  • केजे जॉर्ज: ऊर्जा विभाग और पर्यटन विभाग का अतिरिक्त प्रभार।

  • एमबी पाटिल: बड़े और मध्यम उद्योग विभाग।

  • सतीश जारकीहोली: लोक निर्माण विभाग (PWD)।

  • यतींद्र सिद्धारमैया (पूर्व सीएम सिद्धारमैया के बेटे): शहरी विकास विभाग, जिसमें शहरी जलापूर्ति और जल निकासी बोर्ड शामिल हैं।

  • बैराथी सुरेश: परिवहन विभाग।

  • यू टी खादर: स्वास्थ्य विभाग।