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कोल्हापुर के 'गोकुल' चुनाव की मतगणना में कांटे की टक्कर

तीसरे राउंड के बाद महायुती के 14 और सतेज पाटिल की समविचारी आघाड़ी के 6 उम्मीदवार आगे; विनय कोरे के गढ़ में लगा बड़ा झटका

 

बिजनेस व पॉलिटिक्स डेस्क (भदैनी मिरर): पश्चिम महाराष्ट्र के सहकारिता क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ ('गोकुल') के 25 निदेशक पदों के लिए मतगणना की प्रक्रिया रमणमाला स्थित बहुउद्देशीय सभागार में बेहद रोमांचक और कांटे के मुकाबले के बीच जारी है। रिकॉर्ड 99.96 प्रतिशत मतदान के बाद शुरू हुई मतगणना में भारी पैमाने पर क्रॉस वोटिंग (Cross-Voting) देखने को मिल रही है, जिसने महायुती और पूर्व मंत्री व कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल के राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी, दोनों ही खेमों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

तीसरे राउंड के बाद का समीकरण

35 टेबल पर जारी मतगणना के तीसरे राउंड के अंत तक स्थिति इस प्रकार बनी हुई है:

  • महायुती का पलड़ा भारी: महायुती के 14 उम्मीदवार अपनी बढ़त बनाए हुए हैं। हालांकि, अशोक चरटी, प्रताप पाटिल कावणेकर, एसआर पाटिल, अमर पाटिल, अरुण डोंगले और कर्णसिंह गायकवाड़ जैसे महायुती के प्रमुख उम्मीदवार पीछे चल रहे हैं।

  • समविचारी आघाड़ी की वापसी: सतेज पाटिल के राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी ने तीसरे दौर में जोरदार वापसी करते हुए साधारण वर्ग से अपने 6 उम्मीदवारों—शशिकांत पाटिल-चुयेकर, विद्याधर गुरुबे, बाबासाहेब चौगुले, किसन चौगुले, राहुल देसाई और अभिजीत तायशेटे को आगे ला खड़ा किया है।

विधायक विनय कोरे के गढ़ में लगा झटका

इस मतगणना का सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर जन सुराज्य शक्ति पार्टी के संस्थापक व विधायक विनय कोरे के प्रभाव वाले क्षेत्र में देखने को मिला। उनके बालेकिले में सतेज पाटिल के समर्थित उम्मीदवारों ने जोरदार सेंध लगाते हुए पारंपरिक वोट बैंक के गणित को बिगाड़ दिया है। दूसरी ओर, महायुती के लिए शिरोल, करवीर, भुदरगढ़ और चंदगढ़ तहसीलें जीवनदान साबित हो रही हैं।

50 से 55 फीसदी क्रॉस वोटिंग का अनुमान

राधानगरी तहसील की शुरुआती 25 मतपत्रों की जांच में पाया गया कि केवल 9 मतपत्रों पर ही पैनल-टू-पैनल वोट पड़े थे, जबकि 16 मतपत्रों में मतदाताओं ने दोनों आघाड़ियों के उम्मीदवारों को चुना था। 12 तहसीलों का औसतन अनुमान लगाया जाए तो करीब 50 से 55 फीसदी तक क्रॉस वोटिंग हुई है, जिससे अंतिम परिणाम आने तक अनिश्चितता बनी रहेगी।

मतपेटी से निकलीं संतापजनक चिट्ठियां: कसमों व दबावतंत्र को नकारा

मतगणना के दौरान मतपेटियों से मतदाताओं द्वारा लिखी गईं कुछ तीखी चिट्ठियां भी बाहर आईं, जो दिनभर चर्चा का केंद्र रहीं। चुनाव प्रचार के दौरान कुछ प्रमुख नेताओं द्वारा मतदाताओं को यल्लमा देवी, बाळूमामा या भंडारे पर हाथ रखकर वोट देने की कसम दिलाने और ऐसा न करने पर दैवीय प्रकोप का डर दिखाने का आरोप लगा था।

इसका जवाब देते हुए एक मतदाता ने चिट्ठी में सीधे लिखा, "तुम्हारे बच्चों को जिताने के लिए हम भगवान की कसमें क्यों खाएं?" गुप्त मतदान के जरिए मतदाताओं ने नेताओं के अंधविश्वास और दबावतंत्र के खेल को पूरी तरह नकार दिया है।