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2027 और 2029 के रण के लिए बीजेपी का 2014 वाला दांव: पीयूष गोयल को फिर मिली राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की कमान

यूपी विधानसभा और आगामी लोकसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने की कवायद; संसाधनों और वित्तीय प्रबंधन को मिलेगी नई धार

 

नई दिल्ली/वाराणसी (भदैनी मिरर न्यूज़): भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के गठन के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में बड़े रणनीतिक बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को एक बार फिर से राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीयूष गोयल की संगठन में इस प्रमुख पद पर वापसी महज एक औपचारिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह बीजेपी के '2014 वाले सफल फॉर्मूले' को दोहराने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

2014 के चुनावी अभियान में निभाई थी केंद्रीय भूमिका

पीयूष गोयल के लिए यह पद नया नहीं है। 2014 के ऐतिहासिक लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने वर्ष 2010 से 2014 तक बीजेपी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के रूप में काम किया था। उस दौरान उन्होंने न केवल पार्टी के वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ किया, बल्कि प्रचार और संचार रणनीतियों में भी अहम भूमिका निभाई थी।

चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की पृष्ठभूमि और कॉर्पोरेट व वित्तीय क्षेत्रों में गहरी पकड़ के कारण उन्हें पार्टी के आय-व्यय, चंदे के रिकॉर्ड और चुनाव आयोग के समक्ष जरूरी रिपोर्टिंग को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखने का महारथी माना जाता है।

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 और 2029 का लोकसभा गणित

बीजेपी की इस नई रणनीति के केंद्र में उत्तर प्रदेश है। 2024 के लोकसभा चुनावों में यूपी के भीतर बीजेपी को लगे राजनीतिक झटके के बाद, जहां समाजवादी पार्टी (सपा) ने 37 सीटें जीती थीं और बीजेपी 33 सीटों पर सिमट गई थी, पार्टी अब किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

  • संसाधनों का केंद्रीकरण: 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव 2029 के आम चुनाव की दिशा तय करेगा। 80 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में संगठनात्मक और वित्तीय संसाधनों के सटीक प्रबंधन के लिए पीयूष गोयल जैसे अनुभवी नेता की वापसी को बेहद अहम माना जा रहा है।

  • अनुभवी नेताओं की वापसी: नई टीम में केवल पीयूष गोयल ही नहीं, बल्कि स्मृति ईरानी और राम माधव जैसे अनुभवी चेहरों को भी अहम जिम्मेदारियां देकर संगठन को नीचे तक मजबूत करने की कोशिश की गई है।

दोहरी जिम्मेदारी और आगामी चुनौतियां

पीयूष गोयल वर्तमान में केंद्र सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे हैं। ऐसे में उन्हें सरकार के साथ-साथ संगठन के सबसे बड़े वित्तीय पद की दोहरी जिम्मेदारी निभानी होगी। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि क्या आगामी दिनों में संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल के जरिए संगठन और सरकार के बीच जिम्मेदारियों का नया संतुलन बनाया जाएगा।

कुल मिलाकर, बीजेपी ने 2027 और 2029 के बड़े सियासी दौर से पहले अपने चुनावी तंत्र, वित्तीय प्रबंधन और संगठनात्मक ढांचे को पहले से अधिक चुस्त-दुरुस्त करने का साफ संदेश दे दिया है।

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