यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा दांव: अविनाश पांडेय की छुट्टी, राजेंद्र पाल गौतम को सौंपी उत्तर प्रदेश की कमान
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के एससी मोर्चे के अध्यक्ष बने नए प्रभारी; पिछले महीने मायावती से मुलाकात के बाद आए थे सुर्खियों में
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों (UP Assembly Election) के मद्देनजर कांग्रेस आलाकमान ने राज्य संगठन में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल किया है। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के मौजूदा प्रभारी अविनाश पांडेय को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति (SC) विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम (राकेश पाल गौतम) को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।
राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को पूरी तरह अपने पाले में करने के लिए यह बड़ा दांव खेला है।
मायावती से मुलाकात के बाद गर्माई थी सियासत
राजेंद्र पाल गौतम पिछले महीने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती के आवास पर उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद से ही यूपी की राजनीति में कयासों का दौर शुरू हो गया था और सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा गया था। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर मचे बवाल के बाद राजेंद्र पाल गौतम ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपना रुख स्पष्ट किया था, लेकिन इस घटनाक्रम के ठीक बाद उन्हें यूपी जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिलना बेहद अहम माना जा रहा है।
अंबेडकरवादी राजनीति के बड़े चेहरे हैं राजेंद्र पाल गौतम
उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की गिनती सामाजिक न्याय की मुखर आवाज के रूप में होती है। वह वर्तमान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के एससी मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके साथ ही, वह दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में एक कद्दावर कैबिनेट मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं। अपनी मजबूत अंबेडकरवादी विचारधारा और दलित-शोषित समाज के हक की राजनीति के लिए वे देश भर में जाने जाते हैं।
कांग्रेस को उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में उनके आने से पार्टी का पुराना और पारंपरिक दलित वोट बैंक, जो पिछले कुछ समय से छिटका हुआ है, दोबारा कांग्रेस के पाले में मजबूती से वापस लौट सकता है। चुनावी साल में संगठन का यह फेरबदल जमीनी स्तर पर कितना असरदार साबित होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।