छठ पर्व : पुत्र की दीर्घायु की कामना के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्ध्य

                             

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वाराणसी/भदैनी मिरर । सूर्योपासना का पर्व बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। कार्ति‍क शुक्ल षष्‍ठी ति‍थि‍ को अस्‍ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य देकर व्रतियों ने अपने पुत्र की दीर्घायु की कामना की। इस दौरान व्रती महि‍लाओं के परि‍जन सूप पर अर्घ्‍य देकर पूरे परि‍वार के छठी मइया से आशीर्वाद मांगा।

दोपहर से ही गंगा और वरुणा नदी के साथ शहर के वि‍भि‍न्‍न सरोवरों, कुंडों और तालाबों पर व्रती महि‍लाओं और उनके परि‍जन एकत्रित होने लगे थे। शाम 5 बजकर 3 मि‍नट पर जैसे ही भगवान भास्‍कर अस्‍त होने लगे, व्रतियों और उनके परि‍जनों ने सूर्य देवता को अर्घ्‍य देकर परि‍वार के कल्‍याण की कामना की।

गंगा तट पर दशाश्‍वमेध घाट सहि‍त तमाम घाटों तथा बीएलडब्‍ल्‍यू के सूर्य सरोवर और वरुणा नदी के तट पर स्‍थि‍त शास्‍त्री घाट पर छठ पर्व का पहला अर्घ्‍य पूरी आस्‍था और श्रद्धा के साथ अर्पि‍त कि‍या गया। वहीं कोरोना महामारी को देखते हुए कुछ श्रद्धालुओं ने अपने घर की छतों पर भी अस्‍थायी जलाशय बनाकर छठ पूजा कि‍या और अस्‍ताचलगामी भगवान भास्‍कर अर्घ्‍य दि‍या।

बता दें कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी ति‍थि‍ के दिन अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके अगले दि‍न सुबह सुबह ही उदयीमान सूर्य को अर्घ्‍य देकर छठी मइया के व्रत का पारायण कि‍या जाता है। तीन दि‍न के लंबे व्रत और आखि‍र 36 घंटे के नि‍राजल व्रत को करते हुए माताएं अपनी संतान और पूरे परि‍वार के दीर्घायु की कामना करती हैं।

             

         

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