नटवरनागर ने किया कालिया का मानमर्दन, मनमोहक छवि देखकर निहाल हुए भक्त…

                             

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वाराणसी/भदैनी मिरर। प्रदूषण रूपी फुंफकारों से यमुना के प्रवाह और गोकुल-वृंदावन की आबो हवा में जहर घोल रहे कालीय नाग का दर्प भंग कर पर्यावरण पुरूष भगवान श्रीकृष्ण ने आज फिर एक बार प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया। हालांकि इस वर्ष कोरोना काल के चलते गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा शुरू की गयी श्रीकृष्ण लीला की इस परंपरागत झांकी का दर्शन करने के लिए लोगों की हर साल की अपेक्षा कम भीड़ देखने को मिली। सभी मास्क और सैनिटाइजेशन के बाद ही कार्यक्रम में शामिल हुए। साथ ही काशी नरेश कुंवर अनन्त नारायण सिंह स्वयं इस लीला के साक्षी बने। बता दें कि काशी के लक्खा मेलों में शुमार नाग नथैया की लीला बीते चार सौ सालों से ज्यादे की अनमोल धरोहर के रूप में पूजित है।

दुनिया में अपने आप में अनूठी पांच मिनट की इस लीला के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब स्वयं ही लीला की भावपूर्ण झांकी देखकर अभिभूत था । इस चमत्कारी लीला के दर्शन के लिए तुलसीघाट पर लोग तीसरे पहर से ही इकट्ठे होने लगे थे। गोधूलि के पूर्व 4 बजकर 40 मिनट पर काशी नरेश कुंवर अनंत नारायण सिंह बजड़ें पर आसन लिए तो सम्पूर्ण लीला क्षेत्र ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।

इधर घाट की चौड़ी पथरीली सीढ़ियों पर भगवान श्रीकृष्ण और मित्रों के बीच कंदुक क्रीड़ा जारी थी। खेल-खेल में ही गेंद यमुना में जा गिरी। मित्रों ने उलाहने के साथ भगवान श्रीकृष्ण को वह गेंद वापस ले आने को कहा और घड़ी की सुइयों के चार चालीस पर पहुंचते ही श्री कृष्ण का स्वरूप उफनते कालीय दह मे कूद पड़े। एक मिनट के लिए श्रद्धालुओं का तो जैसे दम अटक गया लेकिन चमत्कार कुछ पल-छिन के अन्दर ही कालीय का फन नाथकर नृत्य मुद्रा में वेणु बजाते हुये भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य झांकी भक्तों आंखों के सामने थी।

सम्पूर्ण लीला क्षेत्र वृंदावन बिहारी लाल की जयकारों से गुंजरित हो उठा था। घाट से लेकर गंगा के पाट तक हर दिशा में आरतियों की लौ बड़ें ही दिव्य वातावरण का सृजन कर रही थी। लोग हाथ जोड़े इस झांकी को अपने अंतर की गहराइयों तक उतार रहे थे। डमरूओं की गड़-गड़ मन में उल्लास के भाव जगा रही थी। ढलती शाम योगेश्वर कृष्ण की वंदना के गीत गा रही थी। परंपरा के अनुसार काशी नरेश ने स्वयं आगे बढ़कर भगवान कृष्ण को माल्यार्पण किया उधर अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के महंत प्रो. विशम्भरनाथ नाथ मिश्र ने समस्त काशीवासियों की ओर से कुंवर अनंत नारायण सिंह को सम्मान पुष्प अर्पित किया।

इस अवसर पर काशीवासियों को उद्बोधन देते हुये अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के महंत प्रो. विशम्भरनाथ मिश्र ने कहा कि आज जरूरत है कि जन-जन भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाए और जिस तरह उन्होनें कालीय दह को प्रदूषण मुक्त किया उसी तरह गंगा के उद्धार को कदम आगे बढ़ाएं। उन्होने कहा कि जनभागीदारी अपनी जगह लेकिन सरकारें भी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ नही सकती क्योंकि व्यवस्था की पूरी कमान उनके ही हाथों में है।

             

         

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