रामनगर की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं व विश्वप्रसिद्ध रामलीला के विविध आयामों रूबरू हुए के. एन. गोविंदाचार्य

                             

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वाराणसी/भदैनी मिरर। देवप्रयाग से गंगासागर तक के अपने अध्ययन प्रवास यात्रा पर निकले प्रख्यात चिंतक के. एन. गोविंदाचार्य मंगलवार को रामनगर स्थित जनकपुर मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए रुके। के. एन. गोविंदाचार्य सुबह लगभग 10 बजे यात्रा दल के साथ पहुंचे। इस दौरान रामलीला व्यास परिवार के पंडित रामनारायण पांडेय ने जनकपुर मंदिर की प्राचीनता व वैशिष्ट्य को बताते हुए रामनगर की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं व विश्वप्रसिद्ध रामलीला के विविध आयामों से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न चारों भाइयों का सपत्नीक विग्रह कोहबर की झांकी के रूप में केवल रामनगर के इस प्राचीन जनकपुर मंदिर में अवस्थित है, इस दृष्टि से यह अद्वितीय है।

इसके साथ ही पंडित रामनारायण पांडेय ने गोविंदाचार्य से रहस्योद्घाटन किया कि उनके पिता स्व. नीलमेघाचार्य (जो कि शिक्षक थे और काशी में हनुमानघाट पर रहते थे) जनकपुर के इसी रामजानकी मंदिर पर अक्सर आकर उनके सहित कई विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा दिया करते थे। अपने पिताजी से जुड़े स्मृति स्थल पर आकर गोविंदाचार्य अभिभूत हुए। पुरानी स्मृतियों को याद कर कुछ देर के लिए गोविंदाचार्य भावुक हो गए। इस अवसर पर गोविंदाचार्य व यात्रादल के साथ पंडित रामनारायण पांडेय, डॉ. अवधेश दीक्षित, आशुतोष पांडेय, बृजेश सिंह, सुशील दुबे आदि लोग मौजूद थें।

             

         

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