कोरोना मरीज के बीएचयू अस्पताल से कूदने पर एमएस बोले, पहले भी किया था कूदने का प्रयास…

                             

  Ford Hospital                           

वाराणसी/भदैनी मिरर। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के कोविड वार्ड मे भर्ती 21 वर्षीय मरीज़ द्वारा चौथी मंजिल से कूद कर आत्महत्या किये जाने के संदर्भ में अस्पताल प्रशासन ने अपना पक्ष रखा है। अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर एस के माथुर ने एक वीडियो के माध्यम से बताया है कि मरीज़ को सर्वप्रथम 16 अगस्त को मानसिक अस्वस्थता के कारण आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में लाया गया था, जहां संबंधित चिकित्सकों द्वारा उसकी जांच कर उसे चिकित्सा हेतु होल्डिंग एरिया में रखा गया। इलाज के दौरान नियमानुसार मरीज़ का सैंपल 19 अगस्त को कोविड परीक्षण के लिए भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट 22 अगस्त को पॉज़िटिव आई और उसी दिन मरीज़ को कोविड वॉर्ड में शिफ़्ट कर दिया गया।

भर्ती होने पर मरीज़ को साइकोसिस (मानसिक रोग) से ग्रसित पाया गया और उसका संबंधित चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जा रहा था। इस बीच मरीज़ का व्यवहार लगातार बहुत असामान्य था, वह बार-बार अपना बेड छोड़कर दूसरे मरीज़ों के पास जाता रहा। इसी दौरान 23 अगस्त की सुबह मरीज़ ने खिड़की से कूदने का प्रयास किया। उस समय मरीज़ को समझा बुझाकर वापस बेड पर लाया गया, उसे दवा दी गई और उसकी काउंसिलिंग की गई, साथ ही साथ संभी संबंधित विशेषज्ञों द्वारा तत्परता से इलाज किया जाता रहा।

चूंकि मरीज़ को कोविड का हल्का संक्रमण था, उसके असामान्य व्यवहार को देखते हुए उसके परिजनों को सुझाव दिया गया कि अस्पताल आकर उसे संयत करें अथवा उसे घर पर ही क्वॉरंटाइन कर दवाएं देकर उसका इलाज करें। मरीज़ के परिवार ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि अस्पताल में ही उसका इलाज किया जाए। इस स्थिति में मरीज का इलाज सुचारू रूप से अस्पताल में चलता रहा परंतु दुर्भाग्य से 23 अगस्त को रात्रि लगभग 11 बजे मरीज़ ने अस्पताल की खिड़की से छलांग लगा दी। घटना के उपरांत तुरंत उसे ट्रॉमा सेन्टर ले जाया गया, जहां पंहुचने पर चिकित्सकों ने जांच कर बताया कि पंहुचने से पहले ही मरीज़ की दुखद मृत्यु हो चुकी थी। 

             

         

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