पढ़ाने को सेनानियों का पाठ खाकी सजाती है पाठशाला

                             

बच्चों को सीखाते हैं आत्मरक्षा के गुण, लॉकडाउन में जन-जन के बने थे मददगार

  Ford Hospital                           

वाराणसी/भदैनी मिरर। पुलिस का नाम लेते ही लोगों के मन में एक डर सा बैठ जाता है। अक्सर लोगों के सामने पुलिस का कठोर और सख्ती भरा चेहरा सामने आता है। लेकिन कुछ पुलिस वाले ऐसे हैं जो न सिर्फ कानून का पाठ पढ़ाते हैं बल्कि बच्चों के लिए पाठशाला भी चलाते हैं। इन्हीं में से एक हैं वाराणसी पुलिस के सब इंस्पेक्टर अनिल कुमार मिश्रा जो वर्तमान में कोतवाली थाने के अम्बियाँमंडी पुलिस चौकी पर तैनात हैं। अनिल मिश्र चौकी में प्रतिदिन शाम में पाठशाला सजती हैं जिसमें क्षेत्रीय बच्चों को न सिर्फ पढ़ाया जाता है, बल्कि उन्हें 1857 के संग्राम से लेकर 1947 में आजादी तक अंग्रेजों की यातना के खिलाफ वीर सपूतों के हौसलों की कहानियां सुनाकर इस कदर मजबूत बनाया जा रहा है कि वह अपने आस-पास होने वाली गलत गतिविधियों का विरोध कर अपराध पर काबू करने में पुलिस की मदद कर सकें। बच्चें भी बड़े चाव से दरोगा जी से महात्मा गांधी, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, बटुकेश्वर दत्त, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, विनायक दामोदर सावरकर, शहीद ऊधम सिंह, मंगल पांडेय, रानी चिन्नमा आदि महान विभूतियों कि कहानियां सुनते हैं।

बच्चों को पढ़ाते हैं आत्मरक्षा का पाठ

पुलिस चौकी के आस-पास ज़्यदातर गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार है। जो अपने भरण-पोषण के लिए छोटे मोटे काम करते हैं। इन परिवारों के बच्चे स्कूल के बाद खाली समय में इधर-उधर घूमा करते हैं, जिससे इनके गलत संगत में पड़ने की आशंका बनी रहती हैं। इसके अलावा परिवार में रहने वाली छोटी बच्चियों के साथ अपराध होने का खतरा भी रहता था। जिसे देखते हुए चौकी प्रभारी अनिल कुमार मिश्र ने पाठशाला के जरिये यहां के बच्चों को पढ़ाने और उन्हें आत्मरक्षा में निपुण करने के उद्देश्य से यह पाठशाला शुरू की है।

लॉकडाउन में इस तरह कर रहे थे मदद

एसआई अनिल कुमार मिश्र को बच्चें प्यार से दरोगा अंकल कहते हैं। लॉकडाउन के मुश्किल दौर में भी एसआई अनिल मिश्र की दरियादिली देखने को मिली थी। उन्होंने क्षेत्र के भूखे लोगों का न सिर्फ पेट भरा बल्कि में बच्चों का भी विशेष ख्याल रखा। इसके साथ ही वह हर रोज शाम में अपने चौकी पर बच्चों को बिस्किट-टॉफी, मास्क व सेनेटाइजर बांटते नजर आते हैं। इसीलिए बच्चों को भी दारोगा अंकल का बेसब्री से इंतजार रहता है। दरोगा अंकल को देखते ही बच्चे खुशी से उछलने लगते हैं। वहीं इन बच्चों का कहना है दरोगा अंकल से हम लोगों को रोज बिस्किट टॉफी मिल रहे हैं।

             

         

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