सलाम है दुश्मन पर सीना ताने CRPF के इस जवान के अदम्य साहस को…

                             

सरहद पर किया कुछ ऐसा कि परिवार समेत पूरा गांव हो रहा गर्वान्वित, 95वीं बटालियन भी पहुंची आवास किया सम्मानित

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वाराणसी/भदैनी मिरर। हमेशा मां भारती की सेवा में लगे सीआरपीएफ जवानों ने एक बार फिर अपने अदम्य साहस और जज्बे का परिचय दिया है। बुधवार को जम्मू कश्मीर के सोपोर में हुए आतंकी हमले की पुरे देश भर में चर्चा हो रही है। आतंकियों की गोलियों की बौछार के बीच तीन वर्षीय मासूम को बचाने वाले सीआरपीएफ के कमांडो पवन कुमार चौबे बहादुरी और वीरता के किस्से उनके गांव चौबेपुर तक लोगो की जुबान पर आ गई हैं। बड़े ही गर्व के साथ जवान के परिजनों समेत गांव के लोग पवन कुमार चौबे की प्रशंसा कर रहे हैं। पवन सीआरपीएफ के उस दस्ते में शामिल थे, जो सोपोर में आतंकी हमले की खबर मिलते ही मौक पर पुलिस के साथ सबसे पहले पहुंचे थे।

कश्मीर के सोपोर में 1 जुलाई को हुए आतंकी हमले में एक 3 साल के बच्चे आयद को अपनी जान पर खेलकर बचाने वाले सीआरपीएफ के कमांडो पवन कुमार चौबे वाराणसी के रहने वाले हैं। चौबेपुर थाना क्षेत्र के कादीपुर स्टेशन के समीप गोलढमकवां निवासी पवन कुमार चौबे 203 कोबरा बटालियन के जवान है। कमांडो पवन 2016 में जम्मू कश्मीर के विभिन्न अभियानों में भी शामिल रहे हैं। 2010 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए और नक्सलियों से कई मोर्चों पर डटकर मुकाबला किया, 2016 में जम्मू कश्मीर ट्रांसफर किया गया, पवन चौबे 179 बटालियन के जांबाज जवान है।

बता दें कि सोपोर में हुए आतंकी हमले की सोशल मीडिया पर एक मार्मिक तस्वीर भी तेजी से वायरल हो रही है। जिसमें एक 3 साल का बच्चा अपने दादा बशीर अहमद की शव के पास रोत हुआ नजर आ रहा है। उसी बीच आतंकियों के गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच बच्चे को बचाने के लिए सीआरपीएफ के जवान पवन कुमार चौबे खुद को रोक न सके और अपनी जान पर खेलकर बच्चे को बचाकर कर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। बच्चा अब पूरी तरह से सुरक्षित अपने मां-पिता के पास है।

सीआरपीएफ के इस जवान के जोश, जज्बे और सहस की सोशल मीडिया पर हर कोई तारीफ कर रहा है। पवन की जांबाजी पर उनके पूरे परिवार को गर्व है. उनकी पत्नी शुभांगी अपने पति की इस बहादुरी से काफी खुश हैं और गर्व महसूस कर रही हैं। उन्होंने पवन की तारीफ करते हुए कहा कि मैं अपने पति को अपनी फ़र्ज़ अदायगी के लिए बधाई देती हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि उन्हें सुरक्षित रखें। गांव के पूर्व प्रधान और पवन के दादा कल्लू चौबे उनकी बहादुरी का यह किस्सा सुन भावुक हो गए और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़ी। पिता सुभाष चौबे ने पवन की इस बहादुरी को आजादी दिलाने वाले महापुरुषों की परंपरा को आगे बढ़ाना बताया। उन्हें अपने बेटे पर बहुत गर्व है।

वहीं पवन की इस बहादुरी की खबर मिलते ही 95 बटालियन के कमांडेंट नरेंद्र पाल सिंह के नेतृत्व में जवानों ने उनके आवास पहुंचकर उनके माता-पिता का माल्यार्पण कर व उन्हें अंगवस्त्रम प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान कमांडेंट ने पवन की इस वीरता की सरहना करते कहा कि भारत माता के वीर सपूत के माता पिता को हम दिल से सलाम करते हैं जिन्होंने ऐसे वीर को जन्म दिया जो अपनी जान पर खेलकर सरहदों पर देशसेवा में लगे हुए हैं।

             

         

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