दावा: कोविड-19 के इलाज में रामबाण साबित हो सकता है गंगाजल!

                             

रिसर्च में खुलासा, आयुष मंत्रालय ने दिखाई दिलचस्पी…

  Ford Hospital                           

वाराणसी/भदैनी मिरर। पूरे विश्व के वैज्ञानिक कोरोना के इलाज को लेकर वैक्सीन बनाने की जद्दोजहद कर रहे है। भारत के तमाम लैब परीक्षण कर लोगों को बचाने के लिए तमाम उपायों की तलाश कर रहे है। इसी बीच काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की ओर से यह दावा किया गया है कि ‘गंगाजल से कोरोना के इलाज में मदद मिल सकती है’। इसके लिए पांच चिकित्सकों ने क्लिनिकल रिसर्च किया है।

बीएचयू सर सुन्दरलाल अस्पताल के पूर्व चिकित्साधीक्षक व ख्यात न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. विजयनाथ मिश्र का यह दावा किया है कि गंगाजल कोरोना के लिए कारगर साबित हो सकता है। प्रकृति ने स्वयं सभी को यह दिखा दिया है कि गंगाजल के औषधि गुण का इस भयावह बीमारी पर कोई न कोई प्रभाव जरूर है इसीलिए पूरे देश में मरीजों की रिकवरी रेट 49 प्रतिशत के आस-पास है। लेकिन गंगा किनारे बसे हुए शहरों का रिकवरी रेट 59 से 60 प्रतिशत है। गोमुख से निकलकर गंगासागर तक 2550 किलोमीटर की यात्रा करने वाली गंगा अपने किनारे बसे शहरों को केवल जल की ही आपूर्ति नहीं करती बल्कि उन्हें संरक्षित भी करती है।

हरिद्वार में 87 केस मिले बल्कि मृत्यु एक भी नहीं है। कानपुर में 466 केस मिले जबकि मृत्यु 13 की हुई। प्रयागराज में 117 केस मिले जबकि मृत्यु केवल 3 की हुई। वाराणसी में 219 केस मिले जबकि मृत्यु 5 की हुई। पटना में 268 केस मिले जिसमे केवल दो की मौत हुई। भागलपुर में 217 केस सामने आए जिसमे मात्र की मौत हुई। गौर करने वाली बात है कि उ. प्र. में रिकवरी रेट 59 तो बनारस में 60 से 62 प्रतिशत है। जो साबित करता है कि इस बीमारी पर गंगा के जल का कोई न कोई सकारात्मक प्रभाव जरूर है।

प्रो. विजयनाथ कहते है कि बात अगर ट्रीटमेंट कि करें तो गंगाजल के फेजेस का एक्सट्रेक्शन करना पड़ेगा। जिसका अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आईसीएमआर और आयुष मंत्रालय दोनों को अनुमति देनी चाहिए। उन्होंने वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग कि की आईसीएमआर और आयुष दोनों मंत्रालय को आदेश दें कि जब इतना अच्छा क्लिनिकल स्टेब्लिशमेंट और क्लिनिकल डाटा उपलब्ध है तो गंगा फेज थेरेपी पर ट्रायल क्यों न किया जाय।

उधर हाईकोर्ट के अरुण गुप्ता ने इसके क्लिनिकल रिसर्च के लिए राष्ट्रपति को पत्र भेजा है, जिसको आयुष मंत्रालय को भेजे जाने की खबर है। आयुष मंत्रालय ने इस मामले में दिलचस्पी दिखाते हुए इससे जुड़े दस्तावेज मांगे है।

             

         

One thought on “दावा: कोविड-19 के इलाज में रामबाण साबित हो सकता है गंगाजल!

  1. जब जीवनदायिनी गंगा हमारे लिए वरदान साबित हुई है तो हम लोग गंगा को गंदा क्यों करते हैं ? कोई जवाब दे सकता है इसका। क्या गंगा के किनारे बसे शहरों के लोग गंगा में नाले की गंदगी बहाना छोड़ेंगे और क्या सरकार इस पर ध्यान देगी और अब तक नमामि गंगे परियोजना में करोड़ों करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन गंगा की दशा वैसी की वैसी ही है। वो सारे पैसे कौन खाया और कहां गए किस भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए?

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