#Interview पूर्वी महिलाओं के लिए अब भी दहलीज लांघना कठिन

                             

जो भी चौखट लांघने की हिम्मत जुटाएगा वही मंजिल को सामने खड़ा पायेगा…

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वाराणसी/भदैनी मिरर। यूपी और बिहार की बहू-बेटियों को आज भी घर की दहलीज पार कर कुछ नया हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। पहले घर फिर समाज के तानें सहने के बाद जब वह आगे बढ़कर लक्ष्य हासिल कर लेती है तो वही परिवार और समाज के आँखों की पुतली बन जाती है। खासकर मॉडलिंग और फिल्मों के क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ने में उन्हें हर वक्त बाधाएं घेरी रहती है। ऐसे ही इन दिनों मॉडलिंग करने वाली युवतियों के लिए रोल मॉडल बन चुकी है वाराणसी की वर्ष 2018 में मिसेज इंडिया (ईस्ट) का ताज पहनने वाली प्रज्ञा पाण्डेय।

मिसेज इंडिया (ईस्ट) 2K18 प्रज्ञा पाण्डेय

कहती है प्रज्ञा पांडेय चुनौतियों से मिलने वाली सफलता जीवन जीने की शिक्षा देती, वह परख कराती है अपने और परायों की। मुझे बचपन से ही मॉडलिंग में रुचि थी परंतु पढ़ाई के दौरान ही शादी होने से एक बार ऐसा लगा की अब सपना केवल सपना ही रहेगा। मगर ससुरालजनों का साथ मिला और मेरे सपनों को पर लग गए। वाराणसी में होने के नाते इस शहर से अच्छा कही और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने का प्लेटफॉर्म नही हो सकता, यह एक अनूठा शहर है जहाँ पूरे साल प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों की कड़ी नहीं टूटती।

शादी होने के कारण प्रज्ञा मिसेज बनारस कांटेस्ट में हिस्सा ली और रनरअप तक ही जा पाई। उन्होंने कहा उस दौरान मुझे संतोष था और हौसला बुलंद होने के कारण आगे सफर तय करने का मन में इरादा था, मगर लोगों के ताने ने एक बार मेरा हौसला पस्त कर दिया, मैंने वही से पीछे हटने की सोच ली। मुझे पीछे न हटने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने में मेरे पति ड़ॉ. अमित तिवारी का अहम योगदान रहा। घरवाले न केवल मानसिक बल्कि सभी तरह से मदद की।

बचपन से ही गाने और अदाकारी की शौक रखने वाली प्रज्ञा अब कुशल गृहिणी और सामाजिक सरोकारों पर काम कर रही है। वह कहती है नारियों को अबला नहीं अब फौलादी बनना होगा। आधी आबादी वाली महिलाओं के लिए शुरु ढपोरशंखी योजनाएं बन्दकर उन्हे स्वावलंबी बनाना होगा। इसलिए मैं सरकार के ‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ’ योजना कों नारियों तक पहुंचा रही हूँ।

Published In Bhadaini Mirror News Paper

सफलता का शॉर्ट कट नहीं होता

प्रज्ञा मॉडलिंग और फिल्मों के क्षेत्र में कदम बढ़ाने वाली युवतियों को सलाह देती है कि सफलता का शार्ट कट नहीं होता। हर व्यक्ति को अपने दम पर मंजिल हासिल करनी होती है, जब हम मदद की किसी से उम्मीद लगा बैठते है वही से शोषण की शुरुआत होती है। किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हमे गुरु बनाना होगा। मगर महिलाओं को गुरु बनाने के लिए पारखी नजर रखनी होगी। चिंता व्यक्त करती हैं कि आज प्रतियोगिता कराने वालों की लंबी फेहरिस्त है ऐसे में जरूरी नहीं कि आप उन्ही कार्यक्रमों में जाएं जिसमे आप प्रतिभागी हों। कई बार हमें अदाकारी में देख कर भी सीखने को मिलती हैं मगर युवा पीढ़ी दर्शक के रूप में प्रतियोगिताओं में जाने से बैर करने लगी है। इस सोच को बदलना होगा और एक दर्शक की भूमिका में अपना फर्ज अदा करना होगा। इसके लिए हर नारी को अपने दम पर आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रुप से मजबूत होना पड़ेगा।

             

         

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