मुहीम : घाटों पर चल रही देर रात बीयर-दारु की पार्टी

                             

खुलेआम बिक रही नशे की सामग्री, ट्विटर पर वीडियो वायरल…

  Ford Hospital                           

वाराणसी/भदैनी मिरर। चंद्राकार काशी के घाट एक बार फिर नशेड़ियों की गिरफ्त में हैं। रात होने के साथ ही युवाओं का जमघट घाटों पर होने लगा है। कहीं कप्लस तो कहीं टोली बनाकर युवा पूरी रात नशे के आगोश में अश्लीलता फैला रहे हैं। गुब्बारा बेचने वाले नौनिहालों के साथ बत्तमीजी पर आमादा हैं। खुलेआम घाटों पर सिगरेट और गांजे का कश लेते युवा और मौन रहती पुलिस ने घाटों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देर रात घाटों पर चल रहे बर्थडे पार्टी, शोर-शराबा और बीयर, दारू के दौर ने घाट पर रहने वाले वाशिंदों की नींद हराम कर रखी है। घाटों और गंगा में दारु और बीयर की बोतलें मिलना आम बात हो गई हैं। लोक-लज्जा से दूर इन युवकों को यदि घाट के वाशिंदे धूम्रपान न करने की सलाह दे तो वह मारपीट करने पर भी आमादा हैं। भदैनी मिरर ने इस समस्या को लेकर समय-समय पर जिला प्रशासन को आगाह किया है मगर पुलिस है कि मानती नहीं। नगर के लंका, भेलूपुर, दशाश्वमेध, चौक, कोतवाली, आदमपुर सहित आधा दर्जन से ऊपर थाने की जिम्मेदारी घाटों की सुरक्षा की है बावजूद इसके शाम ढलते ही घाटों पर न सुरक्षा रह जाती और न ही नशा करने वाले युवकों पर कोई अंकुश।

वाराणसी पुलिस को मिल रही लगातार शिकायत

ट्विटर पर वाराणसी पुलिस को लगातार शिकायत मिलने के बावजूद ठोस कदम उठता नहीं दिख रहा है। ख्यात न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. विजयनाथ मिश्र ने बुधवार देर रात वीडियो ट्वीट कर वाराणसी पुलिस से शिकायत की आखिर किस प्रकार गुब्बारा बेचने वाले बच्चों को नशेड़ी युवक पैरों से मार रहे हैं। ट्विटर पर भेलूपुर प्रभारी निरीक्षक को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। यह केवल भेलूपुर थाना क्षेत्र का ममला नहीं बल्कि पुरे घाटों का हैं। जाँच इस बात की भी होनी चाहिए कि मध्य रात्रि में जब बच्चों के सोने का वक्त होता है तो आखिर कौन उनसे गुब्बारे बेचवा रहा है? इस प्रकारण में स्वतः जिलाधिकारी को संज्ञान लेने की आवश्यकता है।

घाटों पर बिक रहा गुटखा-सिगरेट

माननीय न्यायलय द्वारा सार्वजनिक व् धार्मिक स्थलों पर नशे की सामग्री पर खुलेआम बिक्री पर लगी रोक के बावजूद भी काशी के घाटों पर सिगरेट और गुटखा धड़ल्ले से बिक रहा है। ऐसा नहीं कि पुलिस विभाग को इसकी जानकारी नहीं। पुलिस विभाग को जानकारी होने के बावजूद भी नशे की समाग्री निर्धारित से अधिक दर पर बिकती है। पूछने पर दुकानदार कहते हैं कि घाटों तक लाने और वर्दी की सेवा के बाद हमें कुछ नहीं मिलता। कई जगहों पर अपनी गलती छिपाने के लिए ऐसे लोग वर्दी को बदनाम करते हैं मगर ऐसा भी नहीं की पुलिस विभाग को आल इज वेळ कह दिया जाय। इसके पहले भी कई बार वर्दी दागदार हुई है।

             

         

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