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Ebola Outbreak: इबोला वायरस को लेकर WHO ने घोषित किया ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी, भारत सरकार ने जारी की सख्त ट्रैवल एडवाइजरी

घातक 'बुंडिबुग्यो स्ट्रेन' का बढ़ा खतरा, अफ्रीका से बाहर फैलने का डर

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वेब डेस्क (भदैनी मिरर): कोरोना और मंकीपॉक्स जैसे दौर के बाद अब दुनिया पर एक और बेहद घातक वायरस का खतरा मंडराने लगा है। अफ्रीका के कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस (Ebola Virus) के मामलों में आई अचानक तेजी के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित कर दिया है। इस वैश्विक संकट को देखते हुए भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक सख्त एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों को प्रभावित देशों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।

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WHO ने अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत लागू किया इमरजेंसी

डब्ल्यूएचओ (WHO) की आईएचआर (IHR) आपातकालीन समिति ने अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम, 2005 के तहत इस प्रकोप को लेकर वैश्विक आपातकाल की घोषणा की है। इसके साथ ही अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (Africa CDC) ने भी इसे 'महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित किया है। यह कदम इबोला के बेहद खतरनाक और संक्रामक 'बुंडिबुग्यो स्ट्रेन' (Bundibugyo Strain) के तेजी से फैलने के कारण उठाया गया है।

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इन तीन देशों की यात्रा से बचें भारतीय नागरिक

भारत सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इबोला प्रभावित देशों और उनके सीमावर्ती क्षेत्रों में संक्रमण फैलने का जोखिम सबसे अधिक है। सरकार ने सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक वे इन तीन देशों की गैर-आवश्यक यात्रा टाल दें:

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  1. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC)

  2. युगांडा

  3. दक्षिण सूडान (कांगो और युगांडा की सीमा से सटा होने के कारण यहाँ हाई रिस्क है)

मंत्रालय ने कहा है कि जो भारतीय नागरिक वर्तमान में इन देशों में रह रहे हैं या काम कर रहे हैं, वे स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करें और अत्यधिक सावधानी बरतें।

क्यों खतरनाक है इबोला का 'बुंडिबुग्यो स्ट्रेन'?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला एक घातक वायरल रक्तस्रावी बुखार (Viral Hemorrhagic Fever) है, जिसमें मरीज की मृत्यु दर बेहद अधिक होती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान में बुंडिबुग्यो वायरस स्ट्रेन से निपटने या इसके इलाज के लिए कोई भी प्रामाणिक टीका (Vaccine) या विशिष्ट चिकित्सा उपचार स्वीकृत नहीं है।

भारत में क्या है स्थिति और सरकार की तैयारी?

राहत की बात यह है कि भारत में अब तक बुंडिबुग्यो वायरस या इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, एहतियात के तौर पर सरकार ने डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों को लागू करना शुरू कर दिया है:

डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के मुताबिक, प्रभावित अफ्रीकी देशों से भारत आने वाले सभी यात्रियों की हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर कड़ी स्क्रीनिंग की जाएगी। यदि किसी यात्री में बिना किसी स्पष्ट कारण के तेज बुखार के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे तुरंत आइसोलेट कर उसकी रिपोर्टिंग और इलाज का प्रबंधन किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के सभी अंतरराष्ट्रीय एंट्री पॉइंट्स पर रोग निगरानी (Disease Surveillance) को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं ताकि देश को इस घातक संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।