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प्रशासन ने कसा शिकंजा तो सिकुड़ गई इवेंट मैनेजमेंट वाली मणिकर्णिका घाट वाली चिता भस्म की होली

बैरिकेडिंग के साथ अर्धसैनिक बल, पीएसी और पुलिस फोर्स देख तमाशबीनों की हवा सूख गई

 

डोमराजा परिवार ने दी प्रशासन को बधाई, किया धन्यवाद ज्ञापित

वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी की पुरातन परम्परा के नाम पर इवेंट मैनेजमेंट और लाखों की कमाई की आड़ में पिछले कई सालों से काशी के महाश्मशान पर हो रही चिता भस्म की होली शनिवार को प्रशासन के हल्का कड़ा रूख अपनाते ही सिकुड़ गई। यू-ट्यूबरों और विश्व की प्राचीन नगरी में अद्भुत चिता भस्त की होली के नाम पर चंदा बटोरनेवालों को मायूसी हाथ लगी। साथी इस इवेंट की कवरेज कर करोड़ों की कमाई करने वाले सोशल मीडिया साइट के कथित मीडियाकर्मियों को भी मायूसी हाथ लगी। डोमराजा परिवार के विश्वनाथ चौधरी के तथ्यों को मानते हुए जिला व पुलिस प्रशासन ने ऐसी घेराबंदी की कि महाश्मशान को तमाशा बनानेवालों को सांप सूंघ गया।

इस बार परम्परागत ढंग से बाबा कालभैरव मंदिर के पास से इनका जुलूस निकला, महाश्मशाननाथ की आरती हुई। घाट पर बिना नंगा नाच किये इस बार सभी ‘अच्छे बच्चे‘ नजर आये। घाट के किनाने जाकर अपनी झेप मिटाने के लिए चिता भस्म छिड़क कर अपनी औपचारिकता पूरी की। लेकिन इस बार भी बहुरूपिये औघड़ और साधु के रूप में नजर आये। जबकि वीडियो से इनकी जांच कराई जाय तो पता चल जायेगा कि  यह कभी न तो औघड़ थे और न नागा। लेकिन इस बार महाश्मशान पर इवेंट मैनेजमेंटवालों का ऐसा बाजा बजा कि डोमराजा विश्नाथ चौधरी और उनके परिवारवालों को शांति मिली और उन्होंने जिला प्रशासन और खासकर दशाश्वमेध एसीपी अतुल अंजान त्रिपाठी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

सच तो यही है कि काशी में दोनों महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर कभी चिता भस्म की होली नही खेली जाती थी। कतिपय धंधेबाजों ने इसे काशी की पुरातन परम्परा के नाम पर नंगा नाच शुरू कर दिया था। इस बार डोमराजा परिवार खुलकर सामने आया और उन्होंने पर्याप्त साक्ष्य व तर्क दिये। जिलाधिकारी उनके तर्कों से सहमत हुए और अर्धसैनिक बलों से लगायत पीएसी और पुलिस बलों की  फोर्स, बैरिकेटिंग देख अराजक तत्वों की हवा सूख गई और उन्होंने इस इवेंट मैनेजमेंट से खुद दूरी बना ली। मणिकर्णिकाघाट पर परम्परागत ढंग से जुलूस निकला, महाश्मशानाथ की आरती हुई। घाट पर जाकर चिता भस्म की औपचारिकता पूरी की गई और सभी अपने-अपने रास्ते लौट गये। जिलाधिकारी के आदेश पर इस बार चिता भस्म की होली की अनुमति ही नही दी गई। हर साल होने वाली हुड़दंगई दारू और बीयर के खेल को इस बार प्रशासन ने बिगाड़ के रख दिया। मंदिर में शनिवार को दिन में 12 बजे चिता भस्म की होली खेली हुई और दो बजे के बाद समाप्त गई। एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी ने कहा कि मंदिर परिसर में चिता भस्म की होली की अनुमति है, लेकिन घाट पर इसकी अनुमति नहीं है। बाबा महाश्मशान नाथ मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर भी इस बार नरम नजर आये। कहा कि हर वर्ष की तरह मंदिर में परंपरागत तरीके से विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना के बाद चिता भस्म की होली खेली जाएगी। घाट पर भीड़ आने या न आने का मामला पुलिस प्रशासन का है। नगर निगम के एक अधिकारीने बताया कि कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखकर अनुमति पुलिस देती है। नगर निगम का काम घाटों की सफाई आदि का है।  

लेकिन जब इस पर पुलिस प्रशासन ने शिकंजा कस दिया तो पुरानी परम्परा के नाम पर खेलवाड़ की हकीकत सामने आ गई। इसका वीडियो देखकर समझा जा सकता है कि इससे पहले जो शोक संतप्त परिवारों के बीच होता था वह कितना अनुचित था। घाट पर शव लेकर दाह संस्कार के लिए आये लोगों ने भी प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापन किया। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई थी। लोगां को चिन्हित किया जाने लगा तो तमाशाई लोगों की हवा सूख् गई और लौट गये। गौरतलब है कि कि इस घाट पर अत्याधुनिक शवदाह गृह के निर्माण का कार्य चल रहा है, जिसे टीन शेड से घेरा गया है। सतुआ बाबा आश्रम के पास भी बैरिकेडिंग कर दी गई है। एक घाट से दूसरे घाट तक जाने के लिए जगह-जगह बांस की बल्लियां लगाई गई हैं। इसके अलावा गलियों में भी सादे वेश में महिला पुलिस को लगाया गया था। ले देकर इंवेंट मैनेजमेंट वालों की इस बार ठीक से दुकान नही चल सकी।