बीएचयू में 3.64 करोड़ की मशीन खरीद पर विजिलेंस सख्त, अफसरों से कहा- 'सिर्फ वैध डॉक्यूमेंट दिखाएं'
IMS-BHU में करोड़ों के कथित मशीन घोटाले की लगातार तीसरे दिन जांच, एम्स और शेर-ए-कश्मीर मेडिकल कॉलेज से मंगाए गए दस्तावेज
वाराणसी, भदैनी मिरर: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS) में सीएसआर (CSR) फंड से हुई करोड़ों रुपये की मशीन खरीद का मामला लगातार गर्माता जा रहा है। विजिलेंस टीम ने लगातार तीसरे दिन भी आईएमएस-बीएचयू में डेरा डाले रखा और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड्स खंगाले।
जांच के दौरान विजिलेंस के अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित जिम्मेदारों को सख्त हिदायत दी है। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने दोटूक शब्दों में कहा, "अनावश्यक फाइलों का ढेर लगाने की जरूरत नहीं है, सिर्फ वही वैध डाक्यूमेंट (Valid Documents) दिखाएं जो इस खरीद प्रक्रिया की नियमबद्धता को साबित करते हों।"
क्या है पूरा मामला? करोड़ों के अंतर का है आरोप
यह पूरा विवाद आईएमएस के सर्जरी विभाग में सीएसआर फंड के जरिए 3.64 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई एक मशीन को लेकर शुरू हुआ है। विजिलेंस को मिली शिकायत के मुताबिक:
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आईएमएस-बीएचयू में जो मशीन 3.64 करोड़ रुपये में खरीदी गई, वही समान मशीन शेर-ए-कश्मीर मेडिकल कॉलेज में मात्र 60 लाख रुपये में मिली।
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दिल्ली एम्स (AIIMS) में इसकी कीमत 66 लाख रुपये और खुद बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में इसे 53 लाख रुपये में खरीदा गया था।
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आरोप है कि इस कथित घालमेल के तहत कुल 6 मशीनें 21.89 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में खरीदी गईं।
विजिलेंस टीम अब इन सभी मशीनों के तकनीकी विनिर्देश (Technical Specifications), मॉडल, फीचर्स और कोटेशन से जुड़े दस्तावेजों का तुलनात्मक अध्ययन कर रही है।
एम्स और शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट से भी मंगाए गए रिकॉर्ड
मामले की तह तक जाने के लिए विजिलेंस टीम पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। खरीद, अनुमोदन (Approval) और भुगतान प्रक्रिया (Payment Process) का भौतिक सत्यापन करने के लिए टीम ने शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट और एम्स दिल्ली में खरीदी गई समान मशीनों के मूल दस्तावेज भी मंगवाए हैं।
जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी तस्वीर:
विजिलेंस अधिकारी फिलहाल खरीद से संबंधित बिलों और अनुमोदन पत्रों का एक-एक कर बारीकी से मिलान कर रहे हैं ताकि यह साफ हो सके कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि कीमतों के इस भारी अंतर पर अंतिम निष्कर्ष पूरी जांच और तुलनात्मक रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाएगा।