वाराणसी: आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर वेबीनार; वक्ताओं ने कहा- पर्यावरण की टूटती कड़ियां चिंता का विषय
"वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना" थीम पर जुटे शिक्षाविद, छात्राओं को किया जागरूक।
वाराणसी (भदैनी मिरर): डोमरी (रामनगर) स्थित आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय में शुक्रवार को "अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस" के अवसर पर एक विशेष ऑनलाइन वेबीनार का आयोजन किया गया। इस वेबीनार में महाविद्यालय के प्राध्यापकों और छात्राओं ने हिस्सा लिया और पृथ्वी पर मौजूद जीव-जंतुओं, वनस्पतियों के संरक्षण व पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर गहन मंथन किया।
प्राकृतिक कड़ियों का टूटना वैश्विक चिंता: प्रो. राम नरेश शर्मा
वेबीनार की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम नरेश शर्मा ने जैव विविधता के गूढ़ महत्व को समझाया। उन्होंने कहा, "हमारी पृथ्वी पर लाखों प्रजातियों के जीव और वनस्पतियां मौजूद हैं। इन सभी की अपनी विशेषताएं और अलग-अलग आवास हैं, लेकिन इसके बावजूद ये सभी आपस में प्राकृतिक कड़ियों (Natural Chains) के जरिए एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसी ताने-बाने को हम वैश्विक जैव विविधता कहते हैं।"
उन्होंने चिंता जताते हुए आगे कहा कि आज इंसानी दखल और गतिविधियों के कारण पर्यावरण में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, जिससे ये प्राकृतिक कड़ियां टूट रही हैं, जो पूरी मानव सभ्यता के लिए एक बड़ा संकट है।
जागरूकता के लिए मनाया जाता है यह खास दिन
इस मौके पर सुश्री अनामिका तिवारी ने मुख्य वक्ता के रूप में बताया कि हर साल 22 मई को दुनिया भर में “अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस” मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को पृथ्वी पर मौजूद सभी जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों और बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूक करना है।
वहीं, डॉ. प्रतिमा राय ने इस दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) ने जैव विविधता के संरक्षण के लिए इस पहल की शुरुआत की थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य तेजी से विलुप्त हो रही पौधों और जानवरों की प्रजातियों को बचाना और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के हो रहे नुकसान को रोकना है।
इस वर्ष की थीम: "स्थानीय प्रयास, वैश्विक प्रभाव"
वेबीनार में मुकेश गुप्ता ने इस वर्ष घोषित की गई विशेष थीम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की थीम "वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना" (Acting locally for global impact) रखी गई है। इस थीम का सीधा अर्थ यह है कि जब स्थानीय समुदाय और आम नागरिक अपने स्तर पर छोटे-छोटे पर्यावरण अनुकूल प्रयास करेंगे, तभी वैश्विक स्तर पर जैव विविधता के बड़े लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा।
छात्राओं ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम के अंतिम चरण में वेबीनार के संयोजक डॉ. सूर्य प्रकाश वर्मा ने मुख्य वक्ताओं, महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और तकनीकी रूप से जुड़ीं सभी छात्राओं का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। इस ऑनलाइन संगोष्ठी में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपने आस-पास के पर्यावरण व जैव विविधता को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।