वाराणसी विनीत यादव केस में नया मोड़: निर्दोषों को फंसाने के आरोप में वकीलों का प्रदर्शन
नैपुरा-नथनलंका क्षेत्र में संदिग्ध मौत मामले में पुलिस जांच पर उठे सवाल; अधिवक्ताओं और परिजनों का आरोप— सीसीटीवी और सीडीआर में सबूत न मिलने पर भी बनाया जा रहा दबाव।
भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क: वाराणसी के नैपुरा (नथनलंका) क्षेत्र में विनीत यादव और धीरू यादव से जुड़े संदिग्ध हादसे व मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। एक तरफ जहां पीड़ित परिवार हत्या का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय अधिवक्ताओं और आरोपी बनाए जा रहे युवकों के परिजनों ने पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोल दिया है। वकीलों ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक या अन्य दबाव में आकर निर्दोष युवकों को जबरन फंसाने की कोशिश की जा रही है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
घटनाक्रम के अनुसार, 23 जुलाई की रात नैपुरा क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थिति में घायल विनीत यादव और धीरू यादव को इलाज के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 25 जुलाई को विनीत यादव का निधन हो गया।
परिजनों ने 24 जुलाई को प्रार्थना पत्र देकर साहिल सिंह, गोलू यादव और आकाश जायसवाल पर मारपीट व हत्या का आरोप लगाया था। इसके आधार पर पुलिस ने साहिल और गोलू को हिरासत में लेकर लगभग तीन दिनों तक कड़ाई से पूछताछ की।
साक्ष्यों और लोकेशन का अभाव: वकीलों का दावा
मामले में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक सिंह राजवीर और परिजनों का दावा है कि तीन दिनों की लंबी पूछताछ, सर्विलांस, घटना स्थल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और मोबाइल सीडीआर (CDR) खंगालने के बाद भी पुलिस को नामजद युवकों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
अधिवक्ताओं के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि घटना के वक्त युवक अपने-अपने घरों पर थे और उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष या डिजिटल साक्ष्य नहीं मिला है। 28 जुलाई को पुलिस पूछताछ के बाद युवकों को छोड़ा गया था, लेकिन अब दबाव में आकर फिर से कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस कमिश्नर से मिले अधिवक्ता, निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन
निर्दोषों के बचाव में उतरे अधिवक्ताओं और परिजनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त शिवहरी मीणा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। वकीलों ने मांग की है कि:
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किसी भी निर्दोष व्यक्ति को बिना किसी पुख्ता सबूत या दबाव में आकर आरोपी न बनाया जाए।
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केवल डिजिटल साक्ष्यों, वैज्ञानिक जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ही निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
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असली दोषियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई हो, न कि दबाव में आकर केस दर्ज किया जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उच्चाधिकारियों ने वकीलों को आश्वस्त किया है कि पूरे केस की मॉनिटरिंग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है और केवल इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल एविडेंस के आधार पर निष्पक्ष जांच होगी। किसी भी निर्दोष को जेल नहीं भेजा जाएगा।