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वाराणसी : साढ़े तीन करोड़ के सोने के साथ दो अंतरराष्ट्ीय सोना तस्कर गिरफ्तार, 5.116 किलोग्राम सोना बरामद

तस्करों में एक छात्र तो दूसरा 35 बार जा चुका है जेल, अफ्रीका, बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल के रास्ते लाया जाता है सोना

 

काफी गहरी हैं सोना तस्करों की जड़ें, दिल्ली में करनी थी डिलीवरी

वाराणसी, भदैनी मिरर। आरपीएफ (RPF), जीआरपी (GRP) और सीआईबी (CBI) की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान 19 सोने के बिस्कुट बरामद किए। इसका कुल वजन लगभग 5.116 किलोग्राम (116 ग्राम प्रति बिस्कुट) है। बरामद सोने की कीमत साढ़े तीन करोड़ रूपये बताई गई है। पुलिस ने महाराष्ट्र के रहने वाले दो अंतरराष्ट्रीय तस्करों, बालासो और तेजस बालासाहेब पवार को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से एक तस्कर छात्र है और दूसरा पेशेवर। यह पेशेवर तस्कर अबतक 35 बार जेल जा चुका है, जो इस तस्करी नेटवर्क की गहराई को दर्शाता है। साउथ अफ्रीका से सोना लाकर बांग्लादेश के रास्ते भारत लाया जाता है। तस्करों का नेटवर्क इतना गोपनीय था कि पकड़े गए आरोपितों को यह भी नहीं पता कि उन्हें माल की डिलीवरी किसे देनी है। 

सोना दक्षिण अफ्रीका से तस्करी कर भारत लाया गया था। जांच के अनुसार अफ्रीकी सोने को अक्सर बांग्लादेश के रास्ते भारत में प्रवेश कराया जाता है। इसका खुलासा जीआरपी आईजी एन कोलांची ने किया। उन्होंने बताया कि यह सोना अफ्रीका से लाया गया है और बांग्लादेश के रास्ते पश्चिम बंगाल से भारत में लाया गया। इसकी डिलीवरी दिल्ली में करनी थी। ट्रेन संख्या 20503 डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस में जांच के दौरान आरपीएफ, सीआईबी और जीआरपी की टीम को सफलता हाथ लगी। टीम की संयुक्त कार्रवाई में प्लेटफार्म नंबर 5 पर खड़ी राजधानी एक्सप्रेस से दो लोगों को 5.116 किलोग्राम सोने के साथ पकड़ा गया है। आईजी जीआरपी ने बताया कि आरोपी पश्चिम बंगाल से सोने की तस्करी कर दिल्ली डिलीवरी करने वाले थे। हालांकि इन्हे इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह सोना दिल्ली में किसे देना है। उन्होंने बताया कि इन्हें एक फोन दिया जाता था और उसी के जरिए उनसे कोऑर्डिनेशन होता था। दिल्ली में पहुंचने से पहले इनका फोन आता और बताया जाता है कि यह सोना किसे देना था। इसके साथ ही फोन को भी उसी व्यक्ति को सौंप देना होता है।

आईजी ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी बालासो तस्करी के मामले में 35 बार जेल जा चुका है और हर बार छूटने के बाद तस्करी के इस धंधे में शामिल हो जाता था। फिलहाल, आरपीएफ, जीआरपी और एसआईबी की टीम इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस बड़े नेटवर्क और पूरे गैंग का खुलासा किया जाएगा। टीम ने पकड़े गए सोने को कस्टम विभाग को सुपुर्द कर दिया है और आरोपियों को जेल भेज दिया है। तस्करी के इस गिरोह ने अपना ब्लाइंड डिलीवरी सिस्टम बनाया हुआ है। नेटवर्क इतना सुरक्षित बनाया गया था कि पकड़े गए दोनों तस्करों (बालासो और तेजस पवार) को यह जानकारी नहीं थी कि उन्हें वाराणसी या दिल्ली में यह माल किसे सौंपना है। उन्हें केवल एक स्थान पर पहुंचने और अगले निर्देश का इंतज़ार करने को कहा गया था। जीआरपी ने आरोपितों को जेल भेज दिया है और मामले की जांच कस्टम विभाग को सौंप दी गई है। तस्करों के पास से कुछ कागजात और एक जीपीएस भी मिला है, जिससे गिरोह के नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। तस्कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना खरीदकर उसे बांग्लादेश के रास्ते भारत में लाते हैं और फिर ट्रेन के माध्यम से दिल्ली पहुंचाते हैं। आपको बता दें कि इससे पहले जनवरी 2026 में चौक थाना क्षेत्र से चोरी 3 करोड़ का सोना कैंट स्टेशन के पास से बरामद कर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। अक्टूबर 2024 में प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर 4.08 करोड़ का सोना एक युवक से बरामद हुआ था, जो राजकोट से पटना जा रहा था।