वाराणसी: आईआईटी बीएचयू के सुरक्षाकर्मी पर हमले और कान काटने के मामले में छात्र नेता प्रशांत गिरी समेत दो दोषमुक्त
कोर्ट में आरोप सिद्ध न होने पर मिला संदेह का लाभ; एंबुलेंस पार्किंग को लेकर विवाद में दर्ज हुआ था मुकदमा
वाराणसी (भदैनी मिरर न्यूज़): आईआईटी बीएचयू (IIT BHU) के सुरक्षाकर्मी पर घातक हथियार से हमला करने और कान काटने के चर्चित मामले में बीएचयू के छात्र नेता प्रशांत गिरी और उनके साथी नित्यानंद गिरी को अदालत से बड़ी राहत मिली है। वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (नवम) अमित कुमार यादव की अदालत ने मुकदमे के विचारण (Trial) के दौरान आरोप साबित न होने पर दोनों आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया।
एंबुलेंस पार्किंग के विवाद में दर्ज हुआ था मुकदमा
अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, गाजीपुर के जंगीपुर निवासी धीरेंद्र राय ने लंका थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़ित के मुताबिक, वह आईआईटी बीएचयू में सुरक्षाकर्मी और एंबुलेंस चालक के रूप में कार्यरत है।
21 नवंबर 2025 की रात करीब 9:15 बजे, जब वह मरीज को लेकर सर सुंदरलाल अस्पताल (BHU) की इमरजेंसी के पास एंबुलेंस खड़ी कर रहा था, उसी दौरान छात्र नेता प्रशांत गिरी (निवासी जंसा) और नित्यानंद गिरी (निवासी लोहता) से गाड़ी खड़ी करने को लेकर कहासुनी हो गई। आरोप था कि कहासुनी के दौरान दोनों ने उस पर हमला कर दिया और किसी धारदार हथियार से उसका दाहिना कान काटकर अलग कर दिया। घटना के बाद घायल सुरक्षाकर्मी को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था।
आरोप सिद्ध न होने पर मिला संदेह का लाभ
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को साबित करने में विफल रहा। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव 'गुड्डू' और नरेश यादव ने प्रभावी पैरवी करते हुए कोर्ट में अपना पक्ष रखा।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अनुशीलन करने के बाद छात्र नेता प्रशांत गिरी और नित्यानंद गिरी को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देते हुए केस से बाइज्जत बरी कर दिया।