Varanasi: बेटे पर लगा अपहरण-दुष्कर्म का आरोप तो मां ने 70 महिलाओं संग घेरा चौबेपुर थाना, प्रदर्शन के दौरान नानी हुईं बेहोश
जमीनी रंजिश में निर्दोष को फंसाने का आरोप; धारा 164 के बयान और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग, पुलिस ने दिया आश्वासन
वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो): जिला अंतर्गत चौबेपुर थाना क्षेत्र में पिछले महीने दर्ज हुए एक नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। आरोपित युवक को साजिश के तहत झूठा फंसाने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को उसके परिजनों और ग्रामीणों ने चौबेपुर थाने पर जोरदार प्रदर्शन किया। युवक की मां के नेतृत्व में करीब 70 महिलाएं सुबह 11 बजे से दोपहर ढाई बजे तक थाने के बाहर डटी रहीं और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष व साक्ष्य आधारित जांच की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान बिगड़ी बुजुर्ग नानी की तबीयत
थाने के बाहर चल रहे इस हाई-वोल्टेज प्रदर्शन के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आरोपी युवक की बुजुर्ग नानी दुईजा देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। मौके पर मुस्तैद पुलिसकर्मियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत एम्बुलेंस बुलाई और उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) नरपतपुर भिजवाया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज किया गया।
"जमीनी रंजिश में बेटे को बनाया मोहरा, असली दोषी बाहर"
सीवों चुनाडीह की रहने वाली मीना देवी ने पुलिस और मीडिया के सामने रोते हुए आरोप लगाया कि गांव की ही एक महिला से उनकी पुरानी जमीनी रंजिश चल रही है। इसी आपसी दुश्मनी का बदला लेने के लिए उनके निर्दोष पुत्र करन को इस गंभीर मुकदमे में घसीटा गया है। मीना देवी का दावा है कि करन का इस पूरी घटना से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि:
-
पुलिस ने पूछताछ के नाम पर करन और एक अन्य नाबालिग को थाने बुलाया था, लेकिन बाद में दोनों को जेल भेज दिया गया।
-
विवेचना के दौरान उन महत्वपूर्ण साक्ष्यों और वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी की गई, जो करन को निर्दोष साबित कर सकते हैं।
-
नाबालिग लड़की को कोई और युवक करीब 20 दिनों तक अपने रिश्तेदारों के यहां छिपाकर रखे हुए था, लेकिन पुलिस ने उसे छोड़कर निर्दोष बच्चों को आरोपी बना दिया।
मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान (164) को शामिल करने की मांग
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने मांग उठाई कि इस संवेदनशील मामले में पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज हुए धारा 164 के बयानों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को विवेचना में ईमानदारी से शामिल किया जाए। उनका कहना है कि अगर इन बयानों की सही तरीके से समीक्षा की जाए, तो वास्तविक घटनाक्रम और साजिश रचने वालों का चेहरा बेनकाब हो जाएगा।
एसीपी सारनाथ कर रहे हैं मामले की जांच: थाना प्रभारी
काफी देर तक चली नारेबाजी और हंगामे के बाद चौबेपुर पुलिस ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं को समझा-बुझाकर शांत कराया। प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार सोनकर ने बताया कि इस पूरे मामले की विवेचना खुद एसीपी (ACP) सारनाथ कर रहे हैं। उन्होंने परिजनों को भरोसा देते हुए कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और साक्ष्यों पर आधारित होगी। पुलिस किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होने देगी, लेकिन यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।