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वाराणसी सीवर बोरा कांड: युवा कांग्रेस का नगर निगम पर तंज, विकास सिंह बोले- जलभराव की नाकामी पर पर्दा न डाले प्रशासन

अधिवक्ता विकास सिंह ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की; कहा—साजिश की जांच हो, पर जलजमाव की जवाबदेही भी तय हो

 

वाराणसी / भदैनी मिरर: काशी में सीवर की मुख्य लाइनों में बोरियां ठूंसे जाने के बाद उपजे विवाद में अब राजनीतिक मोड़ आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर युवा कांग्रेस वाराणसी के जिलाध्यक्ष अधिवक्ता विकास सिंह ने नगर निगम प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सीवर में बोरे डालने का कृत्य दंडनीय है तो इसकी निष्पक्ष जांच होकर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इस घटना की आड़ में बनारस की दीर्घकालिक जल निकासी विफलता पर पर्दा नहीं डाला जा सकता।

'अपराध की जांच हो, पर जलभराव की जवाबदेही भी तय हो'

अधिवक्ता विकास सिंह ने अपना बयान जारी करते हुए कहा, "वर्तमान समय में बनारस में सीवर में बोरा डालने की घटना खासी चर्चा में है। यदि यह कृत्य दंडनीय है तो निष्पक्षता से इस घटना की पूरी जांच होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने के उपरांत विधिसम्मत दंडात्मक कार्रवाई भी हो। लेकिन मैं आप सभी का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराना चाहता हूं कि बोरा प्रकरण काशी की दीर्घकालिक जल निकासी विफलता पर पर्दा डालने का माध्यम नहीं है और न ही इसे बनाया जाना चाहिए। अपराध की जांच भी हो और शहर में होने वाले जलजमाव की जवाबदेही भी तय की जाए।"

क्या है पूरा सीवर बोरा प्रकरण?

गौरतलब है कि बीते दिनों वाराणसी नगर निगम द्वारा चलाए गए सफाई अभियान के दौरान शहर के शिवाला, सरायनंदन, नगवा समेत लगभग आधा दर्जन से अधिक वार्डों की मुख्य सीवर लाइनों में बालू से भरी बोरियां, भारी पत्थर, लकड़ी का बुरादा, प्लाई और प्लास्टिक का कचरा ठूंसा हुआ मिला था।

नगर निगम प्रशासन ने इसे शहर को जलमग्न करने की साजिश और अराजक तत्वों की कारस्तानी करार देते हुए भेलूपुर थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दल इसे नगर निगम की ड्रेनेज व्यवस्था की नाकामी और भ्रष्टाचार को छिपाने का बहाना बता रहे हैं।