वाराणसी: 26 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में साड़ी कारोबारी बरी, साक्ष्य के अभाव में कोर्ट का फैसला
₹66,550 की कथित धोखाधड़ी केस में आरोपी राजकुमार कपूर को संदेह का लाभ, दशाश्वमेध थाने में दर्ज था मुकदमा
वाराणसी। 26 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में साड़ी कारोबारी को बड़ी राहत मिली है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (तृतीय) की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपित को दोषमुक्त कर दिया।
साक्ष्य के अभाव में मिला संदेह का लाभ
लाहौरी टोला, सिगरा निवासी साड़ी कारोबारी राजकुमार कपूर के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
26 साल पहले दर्ज हुआ था मामला
अभियोजन के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक (लेखा एवं प्रशासन) राम शरण श्रीवास्तव ने 10 मार्च 2000 को दशाश्वमेध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राज सिल्क इंडस्ट्रीज के पार्टनर राजकुमार कपूर और जयनाथ मिश्रा ने एक फर्जी बैंक ड्राफ्ट के जरिए ₹66,550 की धोखाधड़ी की।
फर्जी ड्राफ्ट से निकाली गई रकम
बताया गया कि बिहार की शाखा से कथित रूप से जारी एक ड्राफ्ट, जो वास्तव में वैध नहीं था, उसे बैंक ऑफ बड़ौदा की गोदौलिया शाखा में जमा कराकर भुगतान प्राप्त किया गया।
बाद में जांच में सामने आया कि उक्त ड्राफ्ट खोए हुए कोरे ड्राफ्ट में से एक था और संबंधित शाखा से जारी ही नहीं हुआ था। आरोप था कि दस्तावेजों में हेरफेर कर बैंक को नुकसान पहुंचाया गया।
कोर्ट में नहीं साबित हुए आरोप
मामले में पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया था, लेकिन सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर सका।
इसके चलते अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
बचाव पक्ष ने रखा पक्ष
अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम ने पैरवी की, जिसके बाद न्यायालय ने आरोपी को राहत दी।