वाराणसी में संत रविदास जी की 649वीं जयंती पर उमड़ा जनसैलाब, प्रशासन ने लिया सुरक्षा और तैयारियों का जायजा
जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और डीआईजी ने स्थलीय निरीक्षण कर भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और सुविधाओं के दिए निर्देश; संत निरंजन दास महाराज का भव्य स्वागत
वाराणसी, भदैनी मिरर। धर्मनगरी काशी में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के अवसर पर शहर भक्ति और समरसता के रंग में डूबा हुआ है। 1 फरवरी को माघ पूर्णिमा पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम से पहले ही देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु वाराणसी पहुँच चुके हैं।
इस ऐतिहासिक पर्व की विशालता और सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए आज प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया।
प्रशासनिक निरीक्षण और सुरक्षा
जिलाधिकारी (DM) सत्येंद्र कुमार, पुलिस कमिश्नर (CP) मोहित अग्रवाल और डीआईजी शिवहरि मीणा ने सीर गोवर्धनपुर स्थित जन्मस्थली और आसपास के क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की समीक्षा की। अधिकारियों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष निर्देश दिए:
- भीड़ नियंत्रण: जर्मन हैंगर पंडाल और मंदिर परिसर में भारी भीड़ को देखते हुए बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन की योजना तैयार की गई।
- सुरक्षा घेरा: डीआईजी ने सुरक्षा बलों को मुस्तैद रहने और सीसीटीवी कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के निर्देश दिए।
- बुनियादी सुविधाएं: जिलाधिकारी ने टेंट सिटी और लंगर स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा।
संत निरंजन दास महाराज का स्वागत
इससे पहले, जालंधर से 'बेगमपुरा स्पेशल ट्रेन' के जरिए संत निरंजन दास महाराज 1600 श्रद्धालुओं के साथ वाराणसी कैंट स्टेशन पहुँचे। स्टेशन पर अनुयायियों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
संत महाराज सीधे सीर गोवर्धनपुर गए, जहां उन्होंने संत रविदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया। उनके आगमन से भक्तों में भारी उत्साह देखा गया और पूरा क्षेत्र "जो बोले सो निर्भय, गुरु रविदास की जय" के जयकारों से गूंज उठा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और भव्य आयोजन
नगवां स्थित संत रविदास पार्क में 30 और 31 जनवरी को 26 घंटे का अखंड सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 50 से अधिक कलाकार भजन और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दे रहे हैं।
मुख्य आयोजन 1 फरवरी 2026 को होगा:
- सुबह 05:52 बजे: अमृतवाणी का पाठ और धार्मिक अनुष्ठान।
- दोपहर: निशान साहब की रस्म और विशेष आरती।
- दिनभर: विशाल सत्संग और अटूट लंगर।
- शाम: भव्य झांकियों का स्वागत।
सुविधाएं और व्यवस्थाएं
प्रशासन ने एनआरआई श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। 150 से अधिक टेंट सिटी में ठहरने की उत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि यह ऐतिहासिक पर्व शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न कराया जाएगा।
वाराणसी इस समय भक्ति, संस्कृति और अनुशासन का प्रतीक बनकर पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है।