वाराणसी: नियम सिर्फ जनता के लिए? थानों के बाहर ही 'नो एंट्री' जैसे हाल, अतिक्रमण हटाने वाली पुलिस खुद घेरे में
वाराणसी पुलिस के 8 थानों पर अतिक्रमण का साया, 5 थाने बने अवैध पार्किंग स्टैंड
वाराणसी। काशी की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने और यातायात सुधारने का दावा करने वाली वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस खुद अपने घर (थानों) के बाहर अव्यवस्था रोकने में नाकाम साबित हो रही है। एक तरफ जहां आम जनता के वाहनों का धड़ाधड़ चालान काटा जा रहा है, वहीं शहर के प्रमुख थानों के बाहर जब्त गाड़ियां और पुलिसकर्मियों के वाहन आधी सड़क घेरे खड़े हैं। आलम यह है कि 8 थानों के सामने 'नो एंट्री' जैसी स्थिति बन गई है।
अभियान के नाम पर सिर्फ जनता पर कार्रवाई?
हाल ही में पुलिस आयुक्त के निर्देश पर चले 12 दिवसीय विशेष अभियान (8 अप्रैल से 26 अप्रैल) में पुलिस ने 4010 चालान काटे और कई एफआईआर दर्ज कीं। लेकिन विडंबना देखिए, जिस पुलिस पर शहर को जाम मुक्त रखने की जिम्मेदारी है, उनके अपने दफ्तरों के बाहर ई-रिक्शा, ठेले और कबाड़ हो चुके वाहनों का कब्जा है।
इन थानों के बाहर सबसे बदतर हालात :
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चौक थाना: श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की 50 से अधिक बाइकें यहां सड़क घेरे रहती हैं। शाम के समय स्थिति और भयावह हो जाती है, लेकिन खाकी की धौंस के आगे नियम मौन हैं।
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लक्सा थाना: रथयात्रा-गोदौलिया मार्ग पर स्थित इस थाने के गेट तक ठेला-खुमचे और जब्त वाहन लगे हैं। फरियादियों को अंदर जाने के लिए महज 3 फीट का रास्ता मिलता है।
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सिगरा थाना: मुख्य द्वार के दोनों ओर 50-50 मीटर तक वाहनों की लंबी कतार रहती है। चंदुआ सट्टी मार्ग पर लावारिस वाहनों के कारण आए दिन जाम लगा रहता है।
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दशाश्वमेध थाना: ई-रिक्शा और अस्थायी दुकानों के बीच थाने का अस्तित्व ही छिप गया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ वाले इस क्षेत्र में पुलिस का अपना ही 'अतिक्रमण' सिरदर्द बना है।
आंकड़ों में चालान की 'मार':
पुलिस ने अभियान के दौरान सक्रियता तो दिखाई, पर उसका रुख एकतरफा रहा:
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8 अप्रैल: 1685 चालान
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15-26 अप्रैल: प्रतिदिन औसतन 200 से अधिक चालान
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कुल कार्रवाई: 4010 चालान
स्थानीय जनता का सवाल: क्या नियम सिर्फ हमारे लिए?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कोई आम आदमी दवा लेने या किसी काम से 2 मिनट के लिए भी सड़क किनारे गाड़ी खड़ी करता है, तो पुलिस तुरंत फोटो खींचकर चालान भेज देती है। लेकिन थानों के बाहर महीनों से सड़ रहे जब्त वाहनों और पुलिसकर्मियों की बेतरतीब पार्किंग पर कोई 'क्रेन' नहीं चलती।
अधिकारियों का पक्ष
इस मामले पर पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि लावारिस वाहनों को हटाने के लिए बड़ागांव में स्थान चिह्नित किया गया है। सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों पर वाहन न खड़े हों। यदि लापरवाही पाई गई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।