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वाराणसी: फांसी लगाकर सुसाइड का प्रयास करने वाली युवती को रि-लाइफ हॉस्पिटल ने दिया नया जीवन, 18 दिन में वेंटिलेटर से स्वस्थ होकर लौटी घर

कई अस्पतालों के इनकार के बाद डॉ. वनिता महस्के और डॉ. प्रियंका अवस्थी की टीम ने उठाया जोखिम, ऑक्सीजन की कमी से गंभीर स्थिति में पहुंची गाजीपुर की 21 वर्षीय युवती पूरी तरह ठीक

 

 

 

 

वाराणसी (भदैनी मिरर)। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐसा चमत्कार देखने को मिला है, जिसने डॉक्टरों को ईश्वर का रूप कहे जाने की कहावत को सही साबित कर दिया। शहर के रि-लाइफ हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने फांसी लगाकर सुसाइड का प्रयास करने वाली 21 वर्षीय एक युवती को मौत के मुंह से बाहर निकालकर नया जीवनदान दिया है। एक सप्ताह तक चले गहन उपचार (ICU & Ventilator) के बाद आज, 20 अगस्त को युवती को पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।


लॉज में लगाई थी फांसी, गाजीपुर की रहने वाली है युवती


प्राप्त जानकारी के अनुसार, मूल रूप से गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली 21 वर्षीय युवती वाराणसी के लंका थाना अंतर्गत छित्तुपुर स्थित एक लॉज में रहकर पढ़ाई और पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य करती थी। विवाद के चलते उसने लॉज के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। घटना की भनक लगते ही उसे तुरंत बेहद गंभीर हालत में पहले बीएचयू और अन्य निजी अस्पतालों में ले जाया गया।

कई अस्पतालों ने हाथ खड़े किए, रि-लाइफ ने लिया रिस्क

फांसी (हैंडिंग) के कारण युवती के मस्तिष्क (Brain) तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो गई थी, जिससे उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई निजी और प्रमुख अस्पतालों ने युवती को भर्ती करने से इनकार कर दिया। परिजनों की आस टूटने लगी थी, तभी उन्हें रि-लाइफ हॉस्पिटल का सहारा मिला।

अस्पताल की निदेशिका डॉ. वनिता महस्के के कुशल नेतृत्व में डॉ. प्रियंका अवस्थी और उनकी क्रिटिकल केयर टीम ने मरीज की जान बचाना प्राथमिकता समझा और जोखिम उठाते हुए 31 जुलाई  को युवती को तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर लेकर इलाज शुरू किया।

मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी बनी थी सबसे बड़ी चुनौती

मामले की जानकारी देते हुए चिकित्सकों ने बताया कि जब युवती को अस्पताल लाया गया था, तब फांसी लगने के कारण उसके दिमाग तक बिल्कुल भी ऑक्सीजन नहीं पहुँच पा रही थी। इसे मेडिकल भाषा में 'हाइपोक्सिक ब्रेन इंजरी' की स्थिति कहा जाता है। ऐसे मामलों में मरीज के बचने या सामान्य स्थिति में लौटने की संभावना बहुत कम होती है।

18 दिनों की अथक मेहनत लाई रंग, आज हुई डिस्चार्ज


डॉ. वनिता महस्के और डॉ. प्रियंका अवस्थी की निगरानी में 31 जुलाई  से लगातार वेंटिलेटर पर रखकर आधुनिक चिकित्सा पद्धति से इलाज किया गया। डॉक्टरों की टीम की दिन-रात की मेहनत और सही समय पर सही निर्णय का नतीजा रहा कि युवती की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। 20 अगस्त को जब युवती पूरी तरह होश में आई और उसकी सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य पाई गईं, तो चिकित्सकों ने उसे मुस्कुराते हुए अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया।

परिजनों ने रि-लाइफ हॉस्पिटल की निदेशिका डॉ. वनिता महस्के, डॉ. प्रियंका अवस्थी और पूरी मेडिकल टीम का सहृदय आभार व्यक्त किया है।

21 वीं केस में अस्पताल को मिली सफलता

निदेशिका डॉक्टर वनिता महस्के ने बताया कि अस्पताल का उद्देश्य मरीजों के चेहरे पर मुस्कान लाना है। यह पहला नहीं बल्कि 21वां मामला था, जब अस्पताल ने रिस्क लिया और चिकित्सकों ने अथक प्रयास से मरीज को मौत के मुंह से खींच लाया है। उन्होंने कहा कि आगे भी हम  मरीजों की सेवा के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे है।