Varanasi: अस्सी घाट पर गंगा आरती के नाम पर वसूली? महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने जताई नाराजगी!
कुर्सी के नाम पर 100-200 रुपये मांगने और बिना रसीद वसूली का आरोप, सीढ़ियों पर बैठने से भी रोके जाने की शिकायत
Mar 27, 2026, 19:22 IST
वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर होने वाली गंगा आरती को लेकर एक विवाद सामने आया है। महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं के एक समूह ने आरती के नाम पर वसूली और बदसलूकी के गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने कहा कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर जांच करवाई जा रही है कि वीडियो कब की है और जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी।
श्रद्धालुओं का कहना है कि उनसे गंगा आरती देखने के लिए कुर्सी के नाम पर 100 से 200 रुपये तक मांगे गए। आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने पर उन्हें वहां से हटा दिया गया, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
30 श्रद्धालुओं का समूह, दूर से पहुंचे थे काशी
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र से करीब 30 श्रद्धालुओं का समूह हजारों किलोमीटर की यात्रा कर काशी पहुंचा था। उनका कहना है कि वे गंगा आरती का दर्शन करने और आध्यात्मिक अनुभव लेने आए थे, लेकिन घाट पर हुए व्यवहार से वे बेहद निराश हैं।
सीढ़ियों पर बैठकर आरती देखने से भी रोका गया
श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कुर्सी के लिए पैसे नहीं दिए, तो उन्हें घाट की सीढ़ियों पर बैठकर आरती देखने से भी रोक दिया गया। उनका कहना है कि यह न केवल अनुचित है, बल्कि आम श्रद्धालुओं के अधिकारों का उल्लंघन भी है।
बिना रसीद वसूली और डराने-धमकाने का आरोप
महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों से पैसे लिए गए, लेकिन बदले में कोई रसीद नहीं दी गई। इसके साथ ही पैसे मांगने के दौरान डराने-धमकाने जैसी स्थिति बनाई गई, जिससे श्रद्धालु असहज महसूस कर रहे थे।
आस्था के साथ खिलवाड़, कार्रवाई की मांग
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे आस्था और विश्वास के साथ काशी आए थे, लेकिन इस तरह की घटनाएं धार्मिक भावना के साथ खिलवाड़ हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी श्रद्धालु को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
धार्मिक नगरी की छवि पर सवाल
गौरतलब है कि अस्सी घाट पर होने वाली गंगा आरती देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। ऐसे में इस तरह के आरोप काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक छवि पर भी सवाल खड़े करते हैं।