वाराणसी: पुलिस टीम पर हमले के आरोपी की गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत, परिजनों ने 'पिटाई' का आरोप लगा काटा बवाल
फूलपुर के घमहापुर कांड से जुड़ा मामला; अस्पताल के बाहर भारी संख्या में जुटे ग्रामीण, डीसीपी समेत कई थानों की फोर्स ने संभाला मोर्चा
वाराणसी (भदैनी मिरर): वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के घमहापुर में पिछले दिनों उद्यमी मनीष सिंह की हत्या के बाद जांच करने गई पुलिस और एसओजी (SOG) टीम पर हुए हमले के मामले में रविवार को बड़ा मोड़ आ गया। पुलिस ने इस हमले के नामजद आरोपी महेश राजभर को गिरफ्तार किया, लेकिन गिरफ्तारी के कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। आरोपी को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर बर्बरतापूर्वक पिटाई का आरोप लगाते हुए वाराणसी-जौनपुर मार्ग पर चक्काजाम कर भारी हंगामा किया।
खालिसपुर से हुई थी आरोपी की गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, बीती 26 अप्रैल को घमहापुर में सड़क दुर्घटना के बाद उद्यमी मनीष सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में जब पुलिस और एसओजी की टीम तफ्तीश और आरोपियों की धरपकड़ के लिए गांव पहुंची थी, तो स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर ही पथराव और हमला कर दिया था। इसी पुलिस टीम पर हमले के मामले में नामजद आरोपी महेश राजभर (28 वर्ष) को फूलपुर पुलिस ने रविवार सुबह खालिसपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया था।
अस्पताल में भर्ती कराने पर भड़के ग्रामीण, लगाया पिटाई का आरोप
परिजनों का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने महेश राजभर की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई। स्थिति बिगड़ती देख फूलपुर पुलिस ने आनन-फानन में उसे हरहुआ क्षेत्र के न्यू लक्ष्मी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। जैसे ही आरोपी की हालत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने की खबर ग्रामीणों को मिली, दर्जनों की संख्या में आक्रोशित लोग अस्पताल के बाहर जुट गए।
नाराज ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वाराणसी-जौनपुर मार्ग को जाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कई थानों की फोर्स के साथ पहुंचे आला अधिकारी, खुलवाया जाम
हाईवे जाम और हंगामे की सूचना मिलते ही महकमे में हड़कंप मच गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए बड़ागांव, सिंधोरा, राजातालाब और शिवपुर सहित कई थानों की पुलिस फोर्स तुरंत मौके पर तैनात कर दी गई। इसके साथ ही डीसीपी गोमती जोन नीतू कादयान, एडीसीपी नृपेंद्र सिंह और एसीपी प्रतीक चौहान समेत कई उच्चाधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए।
समझा-बुझाकर कराया शांत: पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत की। उन्हें निष्पक्ष जांच और उचित इलाज का भरोसा दिलाते हुए काफी मशक्कत के बाद समझा-बुझाकर जाम को हटवाया, जिसके बाद यातायात सुचारू रूप से बहाल हो सका। फिलहाल अस्पताल के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।