Varanasi News: थानेदार से नाराज महिला ने पुलिस कमिश्नर की गाड़ी रोक लगाई गुहार
आरोप - दलित महिला का सिर फूटा, बेटी का हाथ टूटा, पुलिस बोली- '14 दिन बाद होगा मेडिकल और FIR'
वाराणसी, भदैनी मिरर। उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली और 'त्वरित कार्रवाई' के दावों पर वाराणसी के जंसा थाने में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जंसा थाना क्षेत्र के सत्तनपुर गांव की रहने वाली एक दलित महिला ने स्थानीय पुलिस पर बेहद संगीन और संवेदनहीन आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि दबंगों द्वारा उसके और उसकी 18 वर्षीय बेटी पर जानलेवा हमला किए जाने के बावजूद, पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें टरका रही है। पीड़िता ने अब इस मामले में पुलिस कमिश्नर स्तर से दखल देने और क्राइम ब्रांच से जांच कराने की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता ने बताया कि उनके पति गुजरात में मजदूरी करते हैं और वह घर पर अपनी 18 वर्षीय बेटी और बेटे के साथ रहती हैं। आरोप है कि गांव के ही कुछ दबंग (गिरधारी पटेल, बिहारी पटेल, पप्पू पटेल, महेंद्र पटेल, रेखा और नीलम) आए दिन उन्हें जातिसूचक गालियां देते हैं और प्रताड़ित करते रहते हैं।
गत 23 जून 2026 की सुबह करीब 11:30 बजे, विपक्षीगणों ने जबरन पीड़िता के घर के सामने मड़ई रखकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया। जब भानुप्रिया और उनके बच्चों ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
कपड़े फाड़े, सिर फोड़ा और बेटी का तोड़ दिया हाथ
प्रार्थना पत्र में पीड़िता ने अत्यंत दर्दनाक आपबीती सुनाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि "विपक्षीगणों ने हमला कर मेरी साड़ी और अंतःवस्त्र तक खींच दिए और मुझे बुरी तरह अपमानित किया। दबंगों ने मारकर मेरा सिर फोड़ दिया। यही नहीं, मेरी 18 साल की बेटी का दाहिना हाथ तोड़ दिया और उसके भी कपड़े फाड़ दिए। मेरे बेटे को भी बेरहमी से पीटा गया।"
"14 दिन बाद होगा मेडिकल..." जंसा पुलिस का हैरान करने वाला जवाब
पीड़िता का आरोप है कि घटना के वक्त उन्होंने 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी थी। मौके पर पहुंचे रामेश्वर चौकी इंचार्ज और थानाध्यक्ष जंसा ने कोई सख्त कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता से कहा कि "ऊपर से दबाव है, 14 दिन तक घटना का मुआयना होता है और 14 दिन बाद ही मेडिकल व कार्रवाई होगी।"
पीड़िता का कहना है कि थाने जाने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि जंसा पुलिस भी इस घटना में आरोपियों के साथ शामिल है। वर्तमान में स्थिति यह है कि गंभीर रूप से घायल मां-बेटी का अब तक सरकारी दवा-इलाज और मेडिकल भी नहीं कराया गया है।
उच्चाधिकारियों से सुरक्षा और न्याय की गुहार
दबंगों के डर से सहमा पीड़ित परिवार अब अपनी जान बचाने के लिए भटक रहा है। पीड़िता भानुप्रिया ने आलाधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजकर निम्नलिखित मांगें की हैं:
1. तत्काल प्रभाव से मां और बेटी का उचित सरकारी मेडिकल और इलाज कराया जाए।
2. जंसा थाने में आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज हो।
3. स्थानीय पुलिस की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए मामले की विवेचना एसपी स्तर या क्राइम ब्रांच से कराई जाए।
4. पुलिस कमिश्नर स्तर से पीड़ित परिवार की जान-माल की सुरक्षा आज ही सुनिश्चित की जाए।