Varanasi News: नगर निगम के फैसले पर बवाल, शहर से बाहर शिफ्ट होंगी मांस-मछली की दुकानें? व्यापारियों ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन
Varanasi Meat Shops Shifting Row: वाराणसी नगर निगम द्वारा मांस, मछली और पोल्ट्री दुकानों को शहर की सीमा से 8-10 किमी दूर भेजने के प्रस्ताव का विरोध तेज। व्यापारियों ने दिया संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का हवाला।
वाराणसी (भदैनी मिरर): धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में नगर निगम द्वारा पारित एक नए प्रस्ताव को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर निगम वाराणसी द्वारा शहरी क्षेत्र के भीतर से मांस, मछली और मुर्गे (पोल्ट्री) की दुकानों को पूर्णतः हटाकर शहर की सीमा से बाहर सुदूर क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के खिलाफ अब सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रभावित व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। व्यापारियों ने एकजुट होकर इस निर्णय के विरोध में मंडलायुक्त (कमिश्नर) वाराणसी को एक ज्ञापन सौंपकर इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
आजीविका और मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19) पर सीधा प्रहार
मंडलायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में व्यापारियों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) का हवाला देते हुए कहा है कि देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का व्यापार और आजीविका चलाने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। बनारस में मांस-मछली का कारोबार करने वाले अधिकांश दुकानदार गरीब और मध्यम वर्ग से आते हैं, जो पीढ़ियों से इसी व्यवसाय के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि दुकानों को शहर से 8-10 किलोमीटर दूर (जैसे रामनगर, शिवपुर आदि) शिफ्ट करने से उनका रोजगार पूरी तरह ठप हो जाएगा, क्योंकि कोई भी फुटकर ग्राहक मांस-मछली खरीदने इतनी दूर नहीं जाएगा।
खान-पान की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन
ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत नागरिकों को अपनी पसंद का भोजन करने की स्वतंत्रता है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि शहर के भीतर से इन दुकानों को पूरी तरह हटा देने से आम उपभोक्ताओं के लिए प्रोटीन के इस मुख्य स्रोत की उपलब्धता समाप्त हो जाएगी, जिससे उन्हें भारी कठिनाई होगी और यह उनके व्यक्तिगत अधिकारों का अप्रत्यक्ष हनन है। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि इतने बड़े और संवेदनशील विषय पर निर्णय लेने से पहले नगर निगम ने न तो व्यापारियों से संवाद किया और न ही जनता से कोई राय ली।
नियमों में विरोधाभास: ऑनलाइन और मॉल को छूट क्यों?
व्यापारियों ने नगर निगम की नीति पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ छोटे दुकानदारों को हटाया जा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ बड़े होटलों, रेस्टोरेंटों, शॉपिंग मॉल्स और ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों के माध्यम से मांस उत्पादों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है।
व्यापारियों ने सुझाव दिया कि यदि समस्या स्वच्छता और खुले में कटाई को लेकर है, तो दुकानों को शहर से बाहर भेजने के बजाय नगर निगम आधुनिक और बंद दुकानों (रंगीन शीशे, रेफ्रिजरेशन और समुचित कचरा प्रबंधन युक्त) की व्यवस्था सुनिश्चित कराए, जिसका पालन करने के लिए सभी दुकानदार तैयार हैं।
व्यापारियों की प्रमुख मांगें:
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शहर से बाहर दुकानों को पूरी तरह स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाई जाए।
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स्वच्छता और सुंदरीकरण के नाम पर भेदभाव बंद हो और सभी के लिए पारदर्शी व समान नियम लागू किए जाएं।
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मानकों का पालन कराने के लिए बंद दुकानों और कचरा निस्तारण की आधुनिक व्यवस्था शहर के भीतर ही सुलभ कराई जाए।
व्यापारियों ने कमिश्नर से अपील की है कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी और नागरिकों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए और पूर्व की भांति शहर के भीतर ही व्यापार संचालन की अनुमति दी जाए।