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Varanasi News: बाल श्रम के खिलाफ वाराणसी की सड़कों पर उतरे नन्हे कदम, रैली से दिया शिक्षा का संदेश

स्टेशनों के 'खोए बचपन' को नई जिंदगी दे रही है 'डेयर' संस्था

 

वाराणसी: "जब बच्चों के हाथों में किताब होगी, तभी देश का भविष्य रोशन होगा। बाल श्रम नहीं, शिक्षा ही हर बच्चे का अधिकार है।" इसी गूंज और बुलंद इरादों के साथ विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (12 जून) के अवसर पर वाराणसी में एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला. बाल मजदूरी के अंधकार को मिटाने के लिए बच्चों ने खुद अपने हाथों में जागरूकता की मशाल थाम ली.

वाराणसी में पिछले कई वर्षों से वंचित बच्चों के पुनर्वास के लिए कार्यरत सामाजिक संस्था 'डेयर' (DARE) द्वारा छावनी (कैंट) रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 के बाहर एक भव्य जागरूकता रैली का आयोजन किया गया. इस रैली में बच्चों ने हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर आम जनता और राहगीरों से बाल मजदूरी बंद करने व हर बच्चे को स्कूल भेजने की मार्मिक अपील की.

'डेयर' के अनौपचारिक केंद्रों के 100 बच्चों ने भरी हुंकार

इस भव्य रैली में 'डेयर' संस्था द्वारा संचालित अनौपचारिक शिक्षा केंद्रों से जुड़े लगभग 100 बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया. मासूमों के कण्ठ से निकले गगनभेदी नारों और संदेशों ने स्टेशन परिसर से गुजरने वाले हर राहगीर का ध्यान अपनी ओर खींचा और समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि बचपन का असली स्थान कारखानों या दुकानों में नहीं, बल्कि स्कूल की चौखट पर है.

स्टेशनों के 'खोए बचपन' को नई जिंदगी दे रही है 'डेयर' संस्था

साल 2010 से लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय 'डेयर' संस्था वाराणसी के विभिन्न रेलवे स्टेशनों जैसे– कैंट, सिटी, काशी, सारनाथ, बनारस और शिवपुर के आसपास रहने वाले लावारिस, गरीब, बेसहारा, भीख मांगने वाले और कूड़ा बीनने वाले बच्चों के जीवन को संवारने का काम कर रही है. संस्था इन बच्चों को न केवल असुरक्षित माहौल से रेस्क्यू (बचाव) करती है, बल्कि उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य भी प्रदान करती है.

संस्था की बड़ी उपलब्धियां और कार्यशैली:

  • प्रतिदिन पढ़ाई: संस्था द्वारा अलग-अलग स्टेशनों पर संचालित अनौपचारिक शिक्षा केंद्रों में रोज सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक 250 से 300 बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है.

  • मुख्यधारा में दाखिला: इन केंद्रों में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली बच्चों का मूल्यांकन कर अब तक 250 से अधिक बच्चों का दाखिला विभिन्न औपचारिक स्कूलों में कराया जा चुका है.

  • सारनाथ में शेल्टर होम: संस्था के पास सारनाथ की पल्लवी कॉलोनी में एक सुरक्षित शेल्टर होम भी है, जहाँ वर्तमान में 25 ऐसे बेसहारा बच्चे रहकर सुरक्षित माहौल में अपना भविष्य गढ़ रहे हैं जिन्हें देखरेख की सख्त जरूरत थी.

"अकेले नहीं बदल सकते तस्वीर, समाज का सहयोग जरूरी" - फादर रॉबिन

कार्यक्रम और संस्था के उद्देश्यों के बारे में बात करते हुए 'डेयर' संस्था के निदेशक फादर रॉबिन ने कहा:

"आज 12 जून को हम विशेष रूप से बाल श्रम विरोधी दिवस मना रहे हैं। हमारी संस्था बनारस के 6 रेलवे स्टेशनों पर कूड़ा उठाने वाले और स्कूल न जा पाने वाले बच्चों के बचाव और पुनर्वास के लिए साल के 365 दिन रोज काम करती है। आज भी हर चौराहे पर बच्चे भीख मांगते दिख जाते हैं, उन्हें वहां से निकालना और पढ़ाना हमारा और आपका साझा फर्ज है। हम अकेले इस तस्वीर को नहीं बदल सकते, इसके लिए पूरे समाज को जागृत होना होगा और आगे आना होगा।"

वहीं संस्था की कार्यकर्ता शिवानी ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य बच्चों को बाल मजदूरी के दलदल से बाहर निकालना है। उन्होंने कहा, "स्टेशनों पर काम करने के दौरान कई बार बच्चों के माता-पिता को मोटिवेट करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि कुछ पेरेंट्स आर्थिक तंगी के कारण जल्दी नहीं मानते। लेकिन हम लगातार काउंसिलिंग कर उनके मन में पढ़ाई के प्रति अलख जगाते हैं और बच्चों का मनोबल बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करते हैं।"

रेलवे प्रशासन का मिला भरपूर सहयोग

इस वृहद जागरूकता अभियान को सफल बनाने में स्थानीय रेलवे प्रशासन ने भी अपना पूरा योगदान दिया। कैंट स्टेशन के स्टेशन निदेशक, आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) के आला अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया और इस नेक मुहिम की सराहना की।

हर वंचित बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के इस प्रयास में शिशु गृह अधीक्षिका सिस्टर मंजू, संस्था के समस्त स्टाफ सदस्य और शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।