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Varanasi News: नोटिस के 24 घंटे भीतर चला बुलडोजर, मकान मालिक ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का दिया हवाला

बिना नक्शा स्वीकृत कराए निर्माण कराने और जर्जर घोषित भवन पर चले बुलडोजर से इलाके में हड़कंप; प्रक्रिया और समय सीमा पर उठे सवाल, भदैनी मिरर की विशेष रिपोर्ट।

 

वाराणसी / डिजिटल डेस्क (भदैनी मिरर): काशी में अवैध निर्माण और नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए ढांचागत अवैध परिसरों के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में वाराणसी में गुरुवार सुबह एक बार फिर बुलडोजर की गर्जना सुनाई दी। एक भवन को अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित किए जाने के महज 24 घंटे के भीतर संबंधित विभाग ने भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।

अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर PWD, नगर निगम और स्थानीय पुलिस के बड़े अधिकारी मौजूद रहे।

मकान मालिक का आरोप: "सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की उड़ाई गईं धज्जियां"

प्रशासनिक बुलडोजर की इस त्वरित कार्रवाई पर भवन स्वामी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मकान मालिक ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें कार्रवाई से महज 24 घंटे पहले नोटिस थमाया गया था। इतने कम समय में न तो सामान हटाने का वक्त मिला और न ही अपना पक्ष रखने या कानूनी राहत पाने का पर्याप्त अवसर।

पीड़ित पक्ष के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन है कि किसी भी निर्माण को गिराने से पहले संबंधित व्यक्ति को पर्याप्त समय दिया जाए और पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए। बिना पर्याप्त समय दिए सुबह-सुबह ध्वस्तीकरण शुरू करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

एक ही भवन पर दो अलग-अलग दावे: जर्जर घोषित या अवैध निर्माण?

इस पूरे मामले में एक दिलचस्प और कानूनी पेंच भी सामने आ रहा है। मौके पर मौजूद इमरान कादरी उर्फ एलपी बाबा ने बताया कि इस मकान को कुछ दिन पहले ही नगर निगम द्वारा 'जर्जर भवन' घोषित किया गया था और इसको लेकर विभागीय प्रक्रिया पहले से चल रही थी।

अब इसी भवन को 'अवैध निर्माण' के रूप में चिह्नित कर बुलडोजर चलाया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या जर्जर भवन की आड़ में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा किया गया या फिर अवैध निर्माण का मामला अलग से दर्ज था।

अधिकारियों का दावा: बिना स्वीकृत नक्शे के कराया गया था निर्माण

दूसरी ओर, मौके पर मौजूद PWD और नगर निगम के अधिकारियों का रुख बेहद स्पष्ट है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान पाया गया कि संबंधित निर्माण बिना किसी स्वीकृत मानचित्र (Naksha Pass) के कराया गया था।

विभागीय अधिकारियों का पक्ष:

  • जांच में अवैध मिला निर्माण: मौके की स्थिति और विभागीय दस्तावेजों के मिलान के बाद इस निर्माण को अवैध पाया गया था।

  • नियमानुसार कार्रवाई: अधिकारियों का कहना है कि नियमों के तहत नोटिस जारी करने के बाद ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।

  • अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस: बिना नक्शा पास कराए शहर में हो रहे किसी भी व्यावसायिक या आवासीय निर्माण पर कार्रवाई जारी रहेगी।

इलाके में चर्चा का बाजार गर्म

कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। एक तरफ मकान मालिक जहां सुप्रीम कोर्ट के नियमों और मिले समय पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम और PWD अपने दावों को सही ठहरा रहे हैं। फिलहाल ध्वस्तीकरण से जुड़े दस्तावेजों और नोटिस के समय को लेकर मामला प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।