Varanasi News: बनारस में जलजमाव से आक्रोशित लोगों ने किया PM मोदी के संसदीय कार्यालय का घेराव
गुरुधाम कॉलोनी और दिगंबर जैन मंदिर के पास जलजमाव व सीवर की समस्या से बिगड़े हालात; पर्युषण पर्व से ठीक पहले सड़कों पर उतरे बटुक और क्षेत्रीय नागरिक
भदैनी मिरर (सिटी डेस्क): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बारिश और सीवर के पानी के जलजमाव से परेशान स्थानीय नागरिकों का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की लगातार उपेक्षा से आक्रोशित गुरुधाम कॉलोनी के निवासियों ने शुक्रवार को सीधे प्रधानमंत्री के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय का रुख किया और बाहर बैठकर जोरदार प्रदर्शन किया।
अचानक बड़ी संख्या में पहुंचे क्षेत्रीय लोगों और वेदपाठी बटुकों के नारेबाजी करने से मौके पर मौजूद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
दिगंबर जैन मंदिर और गुरुधाम कॉलोनी का बुरा हाल
स्थानीय निवासी मुन्नी देवी जैन ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि पास ही स्थित ऐतिहासिक दिगंबर जैन मंदिर के बाहर महीनों से सीवर और बारिश का पानी जमा है। श्रद्धालुओं को सुबह-सुबह पूजा करने जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया, "16 तारीख से हमारा पावन जैन पर्व (पर्युषण) शुरू हो रहा है। सीवर के पानी और बदबू के कारण घर के दरवाजे पर बैठना भी दूभर हो गया है। बिजली चले जाने पर तो सांस लेना मुश्किल हो जाता है, लेकिन नगर निगम कोई सुनवाई नहीं कर रहा।"
PMO कार्यालय के बाहर घंटों चला धरना
संसदीय कार्यालय से महज कुछ ही दूरी पर स्थित गुरुधाम कॉलोनी में जलजमाव की समस्या वर्षों से बनी हुई है। जब बार-बार शिकायत के बाद भी कोई हल नहीं निकला, तो क्षेत्रीय नागरिक और बटुक हाथों में तख्तियां लेकर संसदीय कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और नगर निगम तथा महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाया-बुझाया और समस्या के त्वरित निस्तारण का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया।
विकास के दावों पर उठे गंभीर सवाल
प्रधानमंत्री के जनसंपर्क कार्यालय के पास ही जलजमाव और सीवर ओवरफ्लो की इस स्थिति ने नगर निगम के विकास के दावों की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पीएमओ कार्यालय के ठीक बगल का यह हाल है, तो शहर के बाकी अंदरूनी इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। आगामी निकाय और अन्य चुनावों के मद्देनजर प्रशासनिक अधिकारियों की यह लापरवाही अब सत्ता पक्ष के लिए भी गले की फांस बनती दिख रही है।