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Varanasi News: मिर्जामुराद थाने में लगी 'किशोरी चौपाल', बेटियों ने पुलिस से पूछा— "बात-बात पर माँ-बहन की गाली क्यों देती है पुलिस?"

नागेपुर समर कैंप की 150 बेटियों ने किया थाना भ्रमण; बेबाक सवालों से पुलिस को किया रूबरू, गांवों में जुआ और अवैध शराब बंद करने की उठाई मांग।

 

वाराणसी (भदैनी मिरर):

ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के मन से पुलिस का डर निकालने और उन्हें अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए गुरुवार को वाराणसी के मिर्जामुराद थाने में एक अनोखा नजारा देखने को मिला। आदर्श ग्राम नागेपुर में संचालित 'किशोरी समर कैंप' के तहत करीब 150 किशोरियों ने मिर्जामुराद थाने का शैक्षिक भ्रमण किया। इस दौरान थाना परिसर में विशेष "किशोरी चौपाल" सजाई गई, जहाँ बेटियों ने न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझा, बल्कि खाकी के व्यवहार पर ऐसे बेबाक सवाल दागे कि अधिकारी भी दंग रह गए।

थानाध्यक्ष ने सिखाए सुरक्षा के मंत्र, दी हेल्पलाइन की जानकारी

चौपाल को संबोधित करते हुए मिर्जामुराद थानाध्यक्ष गोपालजी कुशवाहा ने उपस्थित किशोरियों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने महिला सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों जैसे— 112 (आपातकालीन सेवा), 181 (महिला हेल्पलाइन) और 1090 (विमेन पावर लाइन) के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होंने घरेलू हिंसा कानून, साइबर क्राइम से बचाव के तरीके और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम सहित बच्चों व महिलाओं से जुड़े विभिन्न कानूनों की जानकारी साझा की।

"बात-बात पर माँ-बहन की गाली क्यों देती है पुलिस?" — सुनीता का तीखा सवाल

परिचर्चा के दौरान तब माहौल बेहद गंभीर हो गया जब बेटियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ पुलिस व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाने शुरू किए। कैंप की किशोरी सुनीता ने थानाध्यक्ष से सीधा और तीखा सवाल किया:

"पुलिस अक्सर आम लोगों से बात करते समय माँ-बहन की गालियों का इस्तेमाल क्यों करती है? किसी भी घटना में जिन लोगों का कोई सीधा संबंध नहीं होता, उनके लिए ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना कितना उचित है?"

सुनीता के इस सवाल के बाद अन्य किशोरियों ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस के कड़े व्यवहार और महिलाओं की समस्याओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

थानाध्यक्ष गोपालजी कुशवाहा ने बेटियों की इस तार्किक सोच और बेबाकी की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने सभी सवालों का संवेदनशीलता से जवाब देते हुए कहा कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होना चाहिए। पुलिस हमेशा आम जनता और जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर है और व्यवहार में सुधार के प्रयास लगातार किए जाते हैं।

गांवों में जुआ और अवैध शराब पर रोक लगाने की मांग

संवाद के दौरान कई किशोरियों ने अपने-अपने गांवों में धड़ल्ले से चल रहे जुए के अड्डों और अवैध शराब की बिक्री का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इससे गांवों का माहौल खराब होता है और लड़कियों की सुरक्षा को खतरा रहता है। इस पर पुलिस अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया और ग्रामीणों से भी ऐसे मामलों की गुप्त सूचना पुलिस तक पहुंचाने की अपील की।

भय दूर करने और विश्वास बढ़ाने की एक कोशिश

लोक समिति के संयोजक नन्दलाल मास्टर ने बताया कि आशा ट्रस्ट और लोक समिति संस्था द्वारा लोक समिति आश्रम नागेपुर में 15 मई से ही 'किशोरी समर कैंप' चलाया जा रहा है। इसमें बेटियों को शिक्षा, कला, स्वास्थ्य, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस थाना भ्रमण का मुख्य उद्देश्य यही था कि बेटियों के मन से पुलिस का डर खत्म हो।

वहीं, उपनिरीक्षक गोल्डी ने माना कि समाज में पुलिस की नकारात्मक छवि के कारण ग्रामीण महिलाएं गंभीर परिस्थितियों में भी थाने आने से कतराती हैं। ऐसे में इस तरह की खुली परिचर्चा पुलिस और समाज के बीच की दूरी को पाटने में मील का पत्थर साबित होगी।

अधिकारियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के दौरान संस्था की ओर से थानाध्यक्ष गोपालजी कुशवाहा, पूर्व ग्राम प्रधान नारायण प्रताप सिंह, उपनिरीक्षक गोल्डी और मिशन शक्ति अभियान प्रभारी अनुजा गोस्वामी को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर अविनाश कुमार सिंह, गणेश पटेल, प्रेम कुमार, पवन यादव, संदीप सिंह, आशा राय, सीमा, विद्या, सरिता, निहारिका सहित बड़ी संख्या में किशोरियां और ग्रामीण क्षेत्र के प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।